आसाराम की मेडिकल जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, AIIMS को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (21 July 2026): स्वयंभू संत आसाराम की मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक को उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने बोर्ड को एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि मेडिकल आधार पर राहत दिए जाने की कोई आवश्यकता है या नहीं।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि करीब तीन महीने पहले आसाराम काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले यह दलील दी गई थी कि आसाराम वेजिटेटिव स्टेट (अचेत अवस्था) में हैं, लेकिन अब उनके यात्रा करने के तथ्य सामने आए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केवल मेडिकल बोर्ड की निष्पक्ष रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का फैसला करेगा और फिलहाल नियमित जमानत देने का कोई सवाल नहीं उठता।
वहीं, आसाराम की ओर से पेश वकील ने अदालत से आग्रह किया कि मामले को एम्स के निदेशक के पास भेजा जाए ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी पूरी स्वास्थ्य जांच कर सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल बोर्ड यह भी तय करेगा कि आसाराम की स्थिति ऐसी है या नहीं कि उन्हें अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता पड़े। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश जारी किया।
गौरतलब है कि 27 मई को राजस्थान हाई कोर्ट ने वर्ष 2013 में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि हाई कोर्ट ने उन्हें तत्कालीन भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत लगाए गए कथित सामूहिक दुष्कर्म तथा बच्चे पर यौन हमले के कुछ आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म से संबंधित आईपीसी की धारा 376(2)(F) के तहत उनकी दोषसिद्धि को यथावत रखा था।
अब इस मामले में सभी की निगाहें एम्स के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में अंतरिम जमानत की मांग को उचित ठहराती है या नहीं। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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