भारत के वस्त्र एवं अपैरल निर्यात में 1.8% की बढ़ोतरी, बिहार के निर्यात में भी दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि

टेन न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली | 21 जुलाई 2026

वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव, बढ़ती इनपुट लागत और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत के वस्त्र एवं अपैरल उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में सकारात्मक प्रदर्शन किया है। हस्तशिल्प सहित भारत का कुल वस्त्र एवं अपैरल निर्यात बढ़कर ₹3,25,339 करोड़ पहुंच गया, जो वर्ष 2024-25 के ₹3,19,573.2 करोड़ की तुलना में 1.8 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान भारत के 100 से अधिक निर्यात गंतव्यों में निर्यात वृद्धि दर्ज की गई।

बिहार से भी वस्त्र एवं अपैरल निर्यात में वृद्धि देखने को मिली। वर्ष 2025-26 में बिहार से ₹409 करोड़ का निर्यात हुआ, जबकि वर्ष 2024-25 में यह ₹375.6 करोड़ था। वहीं मध्य प्रदेश से निर्यात मामूली बढ़कर ₹11,751.7 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष ₹11,748.9 करोड़ था।

केंद्र सरकार ने वस्त्र एवं अपैरल उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें पीएम मित्र पार्क योजना, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, समर्थ योजना, सिल्क समग्र-2, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम, व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना, ROSCTL, RoDTEP, निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) और निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSE) प्रमुख हैं।

सरकार ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न समुद्री एवं लॉजिस्टिक चुनौतियों से प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए 19 मार्च 2026 को RELIEF (Resilience and Logistic Intervention for Export Facilitation) पहल भी शुरू की। इसके अलावा घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है।

सरकार के अनुसार भारत के 16 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पहले से लागू हैं, जिनमें भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) शामिल है। इसके अतिरिक्त यूरोपीय संघ के साथ एफटीए वार्ता सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है तथा भारत ने न्यूजीलैंड के साथ भी एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों से भारतीय वस्त्र एवं अपैरल उद्योग को नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।

निर्यातकों को राहत देने के लिए ROSCTL और RoDTEP योजनाओं की अवधि भी 30 सितंबर 2026 तक छह माह के लिए बढ़ा दी गई है, जिससे निर्यातकों को नीतिगत स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सके।

केंद्र सरकार का कहना है कि इन सभी पहलों का उद्देश्य वस्त्र मूल्य श्रृंखला में रोजगार सृजन, मूल्य संवर्धन, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, निर्यात बढ़ाना तथा भारतीय वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को और सशक्त बनाना है। बिहार के खगड़िया और समस्तीपुर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों के वस्त्र एवं अपैरल उद्योग को भी इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

यह जानकारी वस्त्र राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।।


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