क्या स्कूलों का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक हो?

लेखक: गजानन माली

एनसीआर दिल्ली। घने कोहरे, कड़ाके की ठंड, भारी बारिश और भीषण गर्मी के कारण शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर अचानक स्कूलों में अवकाश घोषित किए जाने की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। ऐसे में एक महत्वपूर्ण सवाल फिर चर्चा में है—क्या स्कूलों का समय बदलकर सुबह की बजाय 11 बजे से शाम 5 बजे कर दिया जाना चाहिए?

हर वर्ष सर्दियों में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड, गर्मियों में लू एवं अत्यधिक तापमान तथा वर्षा ऋतु में भारी बारिश और जलभराव के कारण शासन एवं जिला प्रशासन को स्कूल बंद रखने या उनकी समय-सारिणी में बदलाव करने के आदेश जारी करने पड़ते हैं। इसका सीधा असर केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की दिनचर्या पर भी पड़ता है। कई बार अचानक घोषित छुट्टियों के कारण शैक्षणिक कैलेंडर और परीक्षाओं की तैयारी भी प्रभावित होती है।

शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई लोगों का मानना है कि यदि स्कूलों का समय सुबह जल्दी शुरू होने के बजाय 11 बजे से शाम 5 बजे तक कर दिया जाए, तो कई समस्याओं का समाधान हो सकता है। इससे बच्चों की पर्याप्त नींद पूरी होगी, वे आराम से तैयार होकर स्कूल जा सकेंगे और सुबह-सुबह की भागदौड़ कम होगी। वहीं नौकरीपेशा और व्यवसायी अभिभावकों को भी बच्चों को तैयार कराने और स्कूल छोड़ने की जल्दबाजी से राहत मिल सकती है। साथ ही शिक्षकों को भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने का अतिरिक्त समय मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त नींद बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। सुबह जल्दी उठने के कारण कई बच्चे पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जिससे उनकी एकाग्रता, सीखने की क्षमता और समग्र प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, इस प्रस्ताव के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। स्कूल बसों का संचालन, ट्रैफिक प्रबंधन, कोचिंग संस्थानों का समय, खेल गतिविधियां, सह-पाठ्यक्रम कार्यक्रम तथा शिक्षकों की कार्य व्यवस्था जैसे पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।

इसी विषय पर ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रेड्स इंटरनेशनल स्कूल की वरिष्ठ प्राचार्या अदिति बसु का मानना है कि स्कूलों की टाइमिंग पूरे वर्ष एक जैसी रखने के बजाय मौसम के अनुसार तय की जानी चाहिए। उनके अनुसार, यदि गर्मियों में सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक स्कूल चलेंगे, तो अत्यधिक गर्मी के कारण आउटडोर गतिविधियां, खेलकूद और विद्यार्थियों का आवागमन प्रभावित होगा। वहीं सर्दियों में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच बच्चों को सुबह जल्दी स्कूल भेजने के बजाय 11 बजे से शाम 5 बजे तक का समय अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

डॉ. अमृता वर्मा का वक्तव्य: “बच्चों के समग्र शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए स्कूल का सबसे उपयुक्त समय सुबह का होता है। सुबह के समय बच्चे सबसे अधिक सक्रिय, ऊर्जावान और एकाग्र होते हैं, जिससे उनकी सीखने की क्षमता बेहतर रहती है। इसलिए यथासंभव स्कूलों का संचालन सुबह की पाली में ही होना चाहिए। केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों, जैसे अत्यधिक मौसम या आपदा की स्थिति में ही ऑनलाइन शिक्षा को विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है।”

यह विषय केवल समय बदलने का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, सुरक्षित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने का भी है। यदि इस पर सरकार, शिक्षा विभाग, स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच व्यापक चर्चा हो, तो भविष्य में ऐसा मॉडल विकसित किया जा सकता है जो विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों—सभी के लिए अधिक सुविधाजनक और प्रभावी साबित हो।

अब सवाल यह है कि क्या एनसीआर दिल्ली सहित देशभर में मौसम के अनुसार स्कूलों की अलग-अलग टाइमिंग लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए? क्या सर्दियों और गर्मियों के लिए अलग-अलग स्कूल समय होना चाहिए? इस विषय पर आपकी क्या राय है? अपने सुझाव और विचार कमेंट के माध्यम से अवश्य साझा करें।

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