New Delhi News (26 June 2026): नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के धरना प्रदर्शन को अब एक नया और चर्चित समर्थन मिल गया है। लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk ने आंदोलन के समर्थन में बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि यदि सरकार जनता द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर जवाबदेही नहीं दिखाती है, तो वे 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उनके इस बयान के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने लगी है और विभिन्न संगठनों का ध्यान भी इस ओर गया है।
सोनम वांगचुक ने सरकार को 27 जून तक का समय देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना और उसके प्रति जवाबदेह होना सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिल रहा है। वांगचुक के अनुसार यदि निर्धारित समय सीमा तक कोई ठोस पहल नहीं की जाती, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है।
जंतर-मंतर पर सीजेपी का धरना पिछले छह दिनों से लगातार जारी है। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग उठा रहे हैं। संगठन के कार्यकर्ता लगातार छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से इस अभियान में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का मानना है कि सोनम वांगचुक जैसे प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता के समर्थन से उनकी मांगों को व्यापक जनसमर्थन मिलेगा और सरकार पर भी सकारात्मक दबाव बनेगा।
वांगचुक के ऐलान के बाद आंदोलन स्थल पर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी भागीदारी से देश के अलग-अलग राज्यों से अधिक लोग इस आंदोलन से जुड़ सकते हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह केवल किसी एक संगठन का अभियान नहीं, बल्कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक जनहित के मुद्दों की लड़ाई है। इसी वजह से वे विभिन्न सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से समर्थन की अपील कर रहे हैं।
अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने युवाओं और आम नागरिकों से संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर आंदोलन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन परिवर्तन का प्रभावी माध्यम होता है। वांगचुक ने युवाओं से देश के महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति सजग रहने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। अब सबकी निगाहें 27 जून पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया देती है या फिर 28 जून से जंतर-मंतर पर प्रस्तावित भूख हड़ताल शुरू होती है।
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