GIMS विवाद पर किसान सभा का तीखा विरोध, बहाली और न्यायिक जांच की मांग

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (25/06/2026): राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) में अपनी सेवाओं की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय किसान सभा, गौतम बुद्ध नगर ने स्वास्थ्य कर्मियों पर कथित लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। संगठन ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, कर्मचारियों की बहाली और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

गुरुवार को किसान सभा का एक प्रतिनिधिमंडल GIMS पहुंचा और आंदोलनरत स्वास्थ्य कर्मियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और शिकायतों को सुना। प्रतिनिधिमंडल में जिला महासचिव संदीप भाटी, जिला सचिव अशोक भाटी, जिला सचिव एडवोकेट गुरप्रीत सिंह, जिला सचिव भगत सिंह समेत अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे।

कर्मचारियों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अस्पताल परिसर के प्रवेश द्वार बंद कर दिए और बिजली आपूर्ति भी बाधित की गई। उनका आरोप है कि इसके बाद रात के समय धरनास्थल पर बल प्रयोग किया गया, जिसमें कई कर्मचारियों को चोटें आईं तथा बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने महिला स्वास्थ्य कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट के भी आरोप लगाए।

किसान सभा ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। संगठन का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए था, न कि बल प्रयोग के जरिए।

जिला महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर समाज और मरीजों की सेवा की थी। ऐसे कर्मचारियों के साथ कठोर व्यवहार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि उनके योगदान का भी अनादर है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

जिला सचिव अशोक भाटी ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था के तहत लंबे समय से कार्य कर रहे कर्मचारियों को असुरक्षा और शोषण का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को हटाने के बजाय उन्हें रोजगार सुरक्षा प्रदान की जाए।

वहीं जिला सचिव एवं अधिवक्ता गुरप्रीत सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग और महिला कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराए जाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

अखिल भारतीय किसान सभा ने प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें गिरफ्तार सभी स्वास्थ्य कर्मियों की तत्काल रिहाई, लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निलंबन की कार्रवाई, घायल कर्मचारियों के समुचित उपचार की व्यवस्था, आउटसोर्स कोविड योद्धाओं की बहाली तथा महिला स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की न्यायिक जांच शामिल है।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं किया गया और दमनात्मक कार्रवाई जारी रही, तो किसान सभा अन्य जनसंगठनों के साथ मिलकर आंदोलन को व्यापक रूप देगी। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।


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