जहां बन रहे नए हाईवे, वहीं बढ़ी जमीनों की खरीद! मोहन यादव के परिजनों पर उठे सवाल

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (23 June 2026): मध्य प्रदेश के उज्जैन में तेजी से हो रहे शहरी विकास और नई आधारभूत परियोजनाओं के बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav के परिवार की जमीन खरीद को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक विस्तृत पड़ताल में यह सामने आया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिजनों, रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी। रिपोर्ट के अनुसार 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से दिसंबर 2025 तक परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया गया है और इन सौदों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

जांच में सामने आया कि इन खरीददारों में मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, पुत्रवधू शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा यादव, पुत्र अभय यादव तथा चचेरे भाई गोविंद यादव और निलेश यादव शामिल हैं। रिकॉर्ड से यह भी संकेत मिलता है कि इन जमीन सौदों का बड़ा हिस्सा परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से किया गया। कुछ संपत्तियां बाद में बेची भी गईं, जबकि वर्ष 2026 के कई सौदों का रिकॉर्ड अभी सरकारी अभिलेखों में पूरी तरह अद्यतन नहीं हुआ है।

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन क्षेत्रों में जमीन खरीदी गई, उनमें से अधिकांश वे इलाके हैं जहां बाद में नई सड़कें, हाईवे और अन्य विकास परियोजनाएं शुरू हुईं या प्रस्तावित की गईं। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले भी परिवार के पास बड़ी मात्रा में जमीन मौजूद थी, लेकिन दिसंबर 2023 के बाद खरीद की रफ्तार अचानक बढ़ गई। इसी कारण विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

दरअसल उज्जैन मास्टर प्लान 2035 मई 2023 में जारी किया गया था, जब मोहन यादव मुख्यमंत्री नहीं थे। हालांकि उज्जैन की राजनीति और विकास से उनका जुड़ाव वर्षों पुराना रहा है। वे 2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे, 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रमुख रहे और 2013 से उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में यह चर्चा भी तेज हुई है कि विकास योजनाओं की दिशा और भूमि निवेश के बीच कोई संबंध है या नहीं।

जनवरी 2024 में मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने उज्जैन और उसके आसपास नई सड़क एवं हाईवे परियोजनाओं की घोषणाएं कीं। स्थानीय रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के कारण आसपास की जमीनों की कीमतों में वृद्धि लगभग तय मानी जा रही थी। यही कारण था कि इन इलाकों में निवेश को लाभदायक अवसर के रूप में देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री बनने से पहले भी परिवार और रिश्तेदारों के पास लगभग 108 प्लॉट और 179 एकड़ जमीन थी, जिनमें से करीब 85 एकड़ भूमि 2021 से 2023 के बीच खरीदी गई थी, जब मोहन यादव राज्य के शिक्षा मंत्री थे।

दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने 168 एकड़ से अधिक अतिरिक्त भूमि अर्जित की। इनमें लगभग 12 एकड़ भूमि परिवार के सदस्यों के बीच ही हस्तांतरित हुई। अकेले वर्ष 2025 में ही 62 नए प्लॉटों के माध्यम से करीब 92 एकड़ जमीन खरीदी गई। वर्तमान में मोहन यादव के पास सीधे तौर पर लगभग 17 एकड़ भूमि है, जिसमें 4 एकड़ पैतृक संपत्ति और 13 एकड़ जमीन 1998 में खरीदी गई बताई गई है। वहीं उनकी पत्नी सीमा यादव के पास लगभग 10.6 एकड़ भूमि है, जिसे 2008 से 2010 के बीच खरीदा गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि मोहन यादव और सीमा यादव की पारिवारिक कंपनी ‘सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से लगभग 39.5 एकड़ जमीन खरीदी गई। कंपनी में दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 73 प्रतिशत बताई जाती है। इनमें से लगभग 12 एकड़ भूमि सितंबर 2024 में चचेरे भाई निलेश यादव को बेची गई, जबकि कंपनी ने 2024-25 के दौरान अतिरिक्त 2.6 एकड़ भूमि भी खरीदी। अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई कुल 168 एकड़ भूमि में से लगभग 111 एकड़ ऐसी परियोजनाओं के आसपास स्थित है जिनकी घोषणा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुई।

उज्जैन के विभिन्न क्षेत्रों में हुई खरीदारी का विवरण भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार गांगेड़ी में अप्रैल 2024 के बाद 38 प्लॉटों के जरिए लगभग 51 एकड़ भूमि खरीदी गई। कराड़िया-नवाखेड़ा क्षेत्र में करीब 9 एकड़, करोंदिया में लगभग 8 एकड़, जयवंतपुरा में 6 एकड़, चंदेसरा में 9 एकड़ तथा उन्हेल क्षेत्र में 29 एकड़ भूमि खरीदी गई। इसके अलावा उज्जैन मास्टर प्लान 2035 में जिन क्षेत्रों का भूमि उपयोग कृषि से बदलकर आवासीय या व्यावसायिक किया गया, उनमें भी परिवार या रिश्तेदारों की जमीनों की मौजूदगी दर्ज की गई। सावराखेड़ी में मास्टर प्लान जारी होने से कुछ सप्ताह पहले लगभग 30 एकड़ भूमि खरीदी गई थी, जबकि बाद में ऐसे क्षेत्रों में कम से कम 37 एकड़ अतिरिक्त भूमि और खरीदी गई। पांड्याखेड़ी क्षेत्र में भी लगभग 18 एकड़ भूमि खरीदी गई, जिसे पहले ही व्यावसायिक क्षेत्र घोषित किया जा चुका था।

इन खुलासों के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेता Sajjan Singh Verma ने आरोप लगाया कि जिन क्षेत्रों में पहले से परिवार की जमीन मौजूद थी, वहां भूमि उपयोग परिवर्तन कराने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया। राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री के विस्तारित परिवार के व्यावसायिक लेन-देन को सीधे मुख्यमंत्री पद से जोड़ना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय रहा है और जमीन खरीद-बिक्री व्यापार का सामान्य हिस्सा है।

परिवार की ओर से भी सभी आरोपों को खारिज किया गया है। गोविंद यादव और निलेश यादव की ओर से अनंत यादव ने कहा कि उनका परिवार वर्ष 2010 से रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय है और कई बड़े आवासीय प्रोजेक्ट पहले से विकसित कर चुका है। उन्होंने कहा कि निजी नागरिक होने के नाते उन्हें जमीन खरीदने, विकसित करने और बेचने का पूरा अधिकार है। उनका दावा है कि गांगेड़ी परियोजना से जुड़े कई भूमि सौदे वर्ष 2020 से ही चल रहे थे और जिस हाईवे का उल्लेख किया जा रहा है, उसे 2019 में ही मंजूरी मिल चुकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का मुख्यमंत्री से रिश्तेदारी होना उसके व्यवसाय करने के अधिकार को समाप्त नहीं करता।

जांच में यह भी सामने आया कि परिवार के कुछ सदस्यों ने केवल जमीन खरीदने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बड़े डेवलपमेंट एग्रीमेंट भी किए। गांगेड़ी क्षेत्र में खरीदी गई 41 एकड़ भूमि को बाद में चरणबद्ध तरीके से एक बिल्डर कंपनी को विकसित करने के लिए सौंपा गया। समझौते के तहत विकसित परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा जमीन मालिकों के पास रहने वाला है। वहीं निलेश यादव द्वारा संचालित “सांवरिया” ब्रांड के तहत अक्टूबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच चार नई हाउसिंग परियोजनाएं भी पंजीकृत कराई गईं। इन सभी तथ्यों ने उज्जैन में भूमि निवेश, विकास परियोजनाओं और राजनीतिक प्रभाव के संभावित संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि परिवार और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह सब लंबे समय से चल रहे वैध व्यावसायिक निवेश का हिस्सा है, जबकि आलोचक इसे हितों के टकराव और संभावित लाभ के दृष्टिकोण से देख रहे हैं।


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