₹1,600 करोड़ का कोयला घोटाला या रिकॉर्ड की बड़ी चूक? सिंगारेनी के 40 लाख टन कोयले पर सियासत गरम

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (18/06/2026): तेलंगाना की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख खनन कंपनी सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) में कथित तौर पर लगभग 40 लाख टन कोयले के स्टॉक में भारी कमी का मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने इस मुद्दे को गंभीर आर्थिक अनियमितता बताते हुए इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (केटीआर) ने केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज बड़ी मात्रा में कोयला अब स्टॉक में उपलब्ध नहीं है। उनका दावा है कि इस कोयले का बाजार मूल्य करीब ₹1,600 करोड़ आंका जा रहा है और इसकी पूरी जांच आवश्यक है।

कई खदानों के रिकॉर्ड पर उठे सवाल

केटीआर के अनुसार मंडामर्री, श्रीरामपुर, रामागुंडम और भूपालपल्ली क्षेत्र की विभिन्न खदानों में जो कोयला आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद दिखाया गया था, उसकी वास्तविक उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि कोयले को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत कहीं और खपाया या बेचा गया हो सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

केंद्र ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

मामले के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी और तथ्यों की रिपोर्ट तलब की है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार इस पूरे प्रकरण की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर क्यों उत्पन्न हुआ।

कांग्रेस सरकार पर विपक्ष का हमला

बीआरएस ने आरोप लगाया है कि राज्य में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद सिंगारेनी कोलियरीज के संचालन और वित्तीय प्रबंधन में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में कोयला वास्तव में गायब हुआ है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि संभावित आर्थिक अनियमितता भी हो सकता है। वहीं कांग्रेस की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

केटीआर ने इस पूरे मामले की जांच किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल स्वतंत्र जांच ही तथ्यों को सामने ला सकती है और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित कर सकती है।उन्होंने यह भी कहा कि सिंगारेनी केवल एक खनन कंपनी नहीं बल्कि तेलंगाना की अर्थव्यवस्था और हजारों श्रमिक परिवारों की आजीविका का आधार है। ऐसे में कंपनी की साख और संसाधनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

राज्य की ऊर्जा व्यवस्था से जुड़ा है मामला

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि 40 लाख टन कोयला किसी भी सार्वजनिक खनन कंपनी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मात्रा होती है। तेलंगाना और पड़ोसी राज्यों के कई ताप विद्युत संयंत्र सिंगारेनी के कोयले पर निर्भर हैं। इसलिए स्टॉक में किसी भी प्रकार की बड़ी विसंगति का असर ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय प्रबंधन दोनों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए उत्पादन, परिवहन, बिक्री और स्टॉक रजिस्टरों का ऑडिट आवश्यक होगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला रिकॉर्डिंग त्रुटि का है या फिर किसी बड़े वित्तीय घोटाले का।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण ने तेलंगाना की राजनीति और खनन क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें प्रस्तावित जांच और उससे सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े सबसे बड़े विवादों में से एक माना जा सकता है।


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