दिल्ली में सार्वजनिक जगहों से क्यों हटाए गए झंडे, आगे क्या है सरकार का प्लान?

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (18 June 2026): दिल्ली में तेज आंधी और तूफानों के कारण राष्ट्रीय ध्वजों को हुए भारी नुकसान के बाद दिल्ली सरकार अब बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने राजधानी में लगाए गए लगभग 500 विशाल तिरंगों के लिए अधिक मजबूत और टिकाऊ कपड़े की तलाश शुरू कर दी है। मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रत्येक ध्वज को अधिकतम पांच बार धोने के बाद बदला जाता है, जबकि राष्ट्रीय पर्वों जैसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए साल में लगभग चार बार नए झंडे लगाए जाते हैं। हालांकि हाल के मौसमीय बदलावों ने इस व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है, जिसके बाद सरकार ने पूरी प्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है।

पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार ये विशालकाय तिरंगे लगातार धुलाई और मौसम की मार झेलने के कारण कमजोर पड़ जाते हैं। पिछले पखवाड़े में आए तेज तूफानों और 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार वाली हवाओं ने राजधानी के कई इलाकों में लगे झंडों को नुकसान पहुंचाया। सरोजिनी नगर, सीमापुरी, नंद नगरी, निजामुद्दीन, शकूरपुर, मदनपुर खादर, एमजी रोड, अशोक विहार फेज-3, मालवीय नगर, दिलशाद कॉलोनी, नया बाजार और धौला कुआं जैसे क्षेत्रों से झंडों के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट मिली। हालात इतने गंभीर हो गए कि विभाग को खराब मौसम के दौरान सभी 500 झंडों को अस्थायी रूप से हटाना पड़ा।

दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर बड़े राष्ट्रीय ध्वज लगाने की योजना वर्ष 2022 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य राजधानी के प्रमुख स्थलों पर राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना और नागरिकों के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाना था। लेकिन लगातार बदलते मौसम और तेज आंधी-तूफानों ने इन झंडों के रखरखाव को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। अब सरकार मानती है कि पहले इस्तेमाल हो रहे कपड़े और रखरखाव की व्यवस्था में सुधार किए बिना लंबे समय तक इन ध्वजों को सुरक्षित रखना संभव नहीं होगा।

इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने इंजीनियरों की एक विशेष टीम गठित की है, जो देश के प्रमुख गारमेंट निर्यातकों के यहां जाकर अधिक मजबूत कपड़ों का अध्ययन कर रही है। टीम पांच अलग-अलग प्रकार के फैब्रिक का चयन करेगी और उनकी मजबूती, बारिश तथा तूफानी परिस्थितियों में प्रदर्शन और लंबे समय तक टिकाऊपन की जांच करेगी। प्रस्तावित बदलावों में अधिक जीएसएम वाले कपड़े का उपयोग, बेहतर गुणवत्ता की सिलाई, धुलाई की संख्या कम करना और झंडों की वार्षिक नई स्थापना को चार से बढ़ाकर आठ बार करना शामिल है। साथ ही भविष्य के टेंडर में ठेकेदारों के लिए इन नए मानकों का पालन अनिवार्य किया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि इंजीनियरिंग टीम अगले दो सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप देगी, जिसके आधार पर नई नीति लागू की जाएगी। यदि यह योजना सफल रहती है तो दिल्ली में लगाए जाने वाले राष्ट्रीय ध्वज पहले की तुलना में अधिक समय तक सुरक्षित रहेंगे और खराब मौसम का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि देश की गरिमा और सम्मान का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए उसकी गुणवत्ता और रखरखाव में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।


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