टेलीग्राम बैन का मामला पहुंचा दिल्ली हाई कोर्ट

टेन न्यूज नेटवर्क

टेन न्यूज नेटवर्क (17 June 2026): टेलीग्राम पर केंद्र सरकार द्वारा लगाई गई अस्थायी रोक अब कानूनी विवाद का रूप ले चुकी है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस फैसले को चुनौती दी है। अदालत ने बुधवार को मामले की सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब 22 जून को होने वाले NEET-UG री-एग्जाम से पहले सरकार ने परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लागू किया है।

सरकार की ओर से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को जानकारी दी कि टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा, जबकि प्लेटफॉर्म का मैसेज-एडिटिंग फीचर 30 जून तक बंद रखा जाएगा। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी अफवाहों, फर्जी पेपर लीक और छात्रों से ठगी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सरकार के पास यह कदम उठाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। सरकार के निर्देश पर गूगल और एप्पल ने भी अपने-अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम एप को हटा दिया है।

दूसरी ओर, टेलीग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से पेपर लीक करने वाले नहीं, बल्कि भारत के 15 करोड़ से अधिक सामान्य उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि प्रतिबंध लगाने से अपराधी केवल दूसरे प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे और समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। कंपनी का दावा है कि वह लगातार संदिग्ध चैनलों और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करती रही है और 2025 में करोड़ों चैनलों को ब्लॉक भी किया गया था।

सरकार का मानना है कि टेलीग्राम की कुछ विशेष सुविधाएं इसका दुरुपयोग आसान बना देती हैं। प्लेटफॉर्म पर यूजर अपनी पहचान छिपाकर असीमित सदस्यों वाले चैनल बना सकते हैं, जिससे कथित पेपर लीक से जुड़े संदेश तेजी से फैलते हैं। इसके अलावा मैसेज-एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल परीक्षा खत्म होने के बाद पुराने संदेशों में प्रश्नपत्र जोड़कर यह दिखाने के लिए किया जाता था कि पेपर पहले ही लीक हो चुका था। वहीं, 2GB तक की बड़ी फाइलें आसानी से साझा करने की सुविधा भी कथित तौर पर इस दुरुपयोग का एक प्रमुख कारण बनी।

टेलीग्राम और व्हाट्सएप की तुलना भी इस बहस का अहम हिस्सा बन गई है। सरकार का कहना है कि व्हाट्सएप भारतीय नियमों का पालन करता है, मोबाइल नंबर आधारित पहचान अनिवार्य है और ग्रुप सदस्यों की संख्या सीमित रहती है, जिससे निगरानी अपेक्षाकृत आसान होती है। इसके विपरीत टेलीग्राम पर यूजरनेम के जरिए पहचान छिपाई जा सकती है और बड़े सार्वजनिक चैनलों में लाखों लोग जुड़ सकते हैं, जिससे भ्रामक सूचनाएं और कथित पेपर लीक तेजी से फैलते हैं। अब इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई और उसके संभावित फैसले पर टिकी हैं।


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