मोदी सरकार के 12 साल: वैश्विक संकट के बीच किसानों को मिला मजबूत सुरक्षा कवच

टेन न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली (14 जून 2026): प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत के उर्वरक क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सरकार की नीतियों और रणनीतिक प्रयासों के कारण देश ने खाद उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं तथा वैश्विक आपूर्ति संकटों के बावजूद किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की है।

घरेलू उत्पादन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

सरकार के अनुसार वर्ष 2014 के बाद से उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। पिछले 12 वर्षों में देश में छह नए आधुनिक यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रतिवर्ष 76.2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ी है। इसके अलावा 25.4 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले दो और यूरिया संयंत्र जल्द शुरू होने वाले हैं।

यूरिया उत्पादन वर्ष 2014-15 के 225 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2023-24 में 314.07 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं 2024-25 में भी 306.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया।

फॉस्फोरस एवं पोटाश (P&K) उर्वरकों का उत्पादन भी 2014-15 के 159.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 211.22 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।

खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त खाद भंडार

सरकार ने आगामी खरीफ सीजन के लिए पहले से ही व्यापक तैयारियां कर ली हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार खरीफ 2026 के लिए 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। इसके मुकाबले वर्तमान में लगभग 195.79 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है।

यह कुल आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक अग्रिम भंडारण है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह आंकड़ा लगभग 33 प्रतिशत रहता था। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

वैश्विक महंगाई के बावजूद किसानों को राहत

रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद सरकार ने किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया।

वैश्विक बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत 4,100 रुपये से अधिक होने के बावजूद किसानों को 45 किलोग्राम की बोरी मात्र 266.50 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है।

डीएपी (DAP) की 50 किलोग्राम बोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 रुपये से अधिक की होने के बावजूद किसानों को 1,350 रुपये में मिल रही है।

सरकार का कहना है कि भारी सब्सिडी के माध्यम से किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

टिकाऊ खेती को बढ़ावा

सरकार ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण-अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं।

वर्ष 2025-26 में FOM, LFOM और PROM जैसे जैविक उर्वरकों की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में सात गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा अमोनियम सल्फेट की खपत में लगभग 60 हजार टन की बढ़ोतरी हुई है।

देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की निगरानी में 1.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीन मैन्योरिंग (हरी खाद) को बढ़ावा दिया गया है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है।

किसानों के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र

सरकार का दावा है कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि, पर्याप्त अग्रिम भंडारण, विविध आयात स्रोतों और प्रभावी आपूर्ति प्रबंधन के कारण देश की खाद सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता वर्तमान में मांग से अधिक बनी हुई है, जिससे किसानों को समय पर और किफायती दरों पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चुनौतियों और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का उर्वरक क्षेत्र अब पहले की तुलना में अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनकर उभरा है।।


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