नई दिल्ली में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा, एनडीएमसी ने लॉन्च किया ‘प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी.’
टेन न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली (14 जून 2026): नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने राजधानी में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. (Develop Responsible Outlook for Plastic)’ का शुभारंभ किया। एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने किआ इंडिया और इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के सहयोग से इस परियोजना का उद्घाटन किया।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन, मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) और विकसित भारत @2047 के विजन से प्रेरित है। परियोजना का उद्देश्य प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है, साथ ही नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
पुनर्चक्रित प्लास्टिक से बने सामुदायिक डिब्बों का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान कुलजीत सिंह चहल ने पुनर्चक्रित प्लास्टिक कचरे से निर्मित डी.आर.ओ.पी. सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया और प्लास्टिक कचरा संग्रहण के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए डी.आर.ओ.पी. संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक अपशिष्ट के व्यवस्थित संग्रहण और पुनर्चक्रण प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ हो गया।
इस अवसर पर एनडीएमसी परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि, आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग, उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल, किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल सूद, एनडीएमसी की मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव, विभिन्न आरडब्ल्यूए, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन (एमटीए) के प्रतिनिधि तथा अन्य हितधारक उपस्थित रहे।
स्वच्छ भारत मिशन की विरासत को आगे बढ़ाने की पहल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि एनडीएमसी के लिए यह गर्व और जिम्मेदारी दोनों का विषय है कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ एनडीएमसी क्षेत्र स्थित वाल्मीकि बस्ती से किया था।

उन्होंने कहा कि भले ही एनडीएमसी भौगोलिक रूप से एक छोटा शहरी निकाय है, लेकिन इसके अधिकार क्षेत्र में संसद भवन, केंद्रीय मंत्रालय, विदेशी दूतावास और राष्ट्रीय महत्व के कई संस्थान आते हैं। ऐसे में यहां संचालित स्वच्छता एवं पर्यावरणीय पहलें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देती हैं।
2021 से आईपीसीए के साथ सफल साझेदारी
कुलजीत सिंह चहल ने बताया कि एनडीएमसी वर्ष 2021 से आईपीसीए के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। इस सहयोग के तहत अब तक:
• 115 एरोबिन स्थापित किए गए हैं।
• 62,958 किलोग्राम गीले कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया गया है।
• 10,013 किलोग्राम कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के तहत पूरे एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा संग्रहण के लिए विशेष डिब्बे लगाए जाएंगे और अधिकृत पुनर्चक्रण चैनलों के माध्यम से कचरे का निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
जनभागीदारी के बिना संभव नहीं समाधान : अनिल वाल्मीकि
एनडीएमसी परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि ने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट न केवल पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार और नगर निकायों के प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब नागरिक भी प्लास्टिक कचरे के पृथक्करण और उचित निस्तारण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
उन्होंने आरडब्ल्यूए, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग करने का आह्वान किया।
किआ इंडिया ने जताई प्रतिबद्धता
किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (सेल्स एवं मार्केटिंग) अतुल सूद ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे शहरी भारत में टिकाऊ और संरचित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के माध्यम से किआ इंडिया जिम्मेदार प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने और व्यवहारगत परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस पहल को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लागू करने और इसे देशभर के लिए एक आदर्श मॉडल बनाने पर गर्व व्यक्त किया।
अन्य शहरों के लिए भी बन सकता है मॉडल
आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि आईपीसीए की उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल ने परियोजना की कार्यप्रणाली, संभावित प्रभाव और इसे देश के अन्य शहरों में लागू किए जाने की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
कार्यक्रम में विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशनों तथा एनडीएमसी के स्वच्छता, उद्यान और सिविल अभियांत्रिकी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
स्वच्छ और हरित नई दिल्ली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
एनडीएमसी, किआ इंडिया और आईपीसीए की साझेदारी में शुरू किया गया प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. राजधानी में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, लैंडफिल पर बढ़ते दबाव को घटाने और नागरिकों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह परियोजना भविष्य में देश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।
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