New Delhi News (11/06/2026): संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक स्तर पर उसके पुनरुत्थान को लेकर नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट आयोजित की गई। इस अवसर पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने श्री लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक से मुलाकात कर संस्कृत शिक्षा के विकास, शोध एवं उसके भविष्य को लेकर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. पाठक द्वारा शिक्षा मंत्री का पुस्तक भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान संस्कृत भाषा की वर्तमान स्थिति, उसके शैक्षणिक महत्व और बदलते समय में उसकी उपयोगिता पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन, साहित्य और ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा की आधारशिला है। इसलिए इसके अध्ययन-अध्यापन और अनुसंधान को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बिहार में संस्कृत शिक्षा के विस्तार के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों को मजबूत बनाने, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने तथा विद्यार्थियों के बीच संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि संस्कृत को डिजिटल तकनीक, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाए तो यह नई पीढ़ी के लिए अधिक प्रासंगिक और आकर्षक बन सकती है।
कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित संस्कृत संवर्धन कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल पारंपरिक संस्कृत शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भाषा को समकालीन संदर्भों में उपयोगी और प्रभावशाली बनाना भी है। इसी दिशा में विश्वविद्यालय डिजिटल संसाधनों, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को लगातार बढ़ावा दे रहा है।
कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय नवाचार आधारित पहलों पर विशेष ध्यान दे रहा है।
बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व मंच पर स्थापित करने और संस्कृत को वैश्विक बौद्धिक विमर्श का हिस्सा बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण बौद्धिक और सांस्कृतिक संपदा है, जो मानवता को ज्ञान और मूल्य आधारित दृष्टि प्रदान कर सकती है।
यह शिष्टाचार भेंट संस्कृत भाषा के विकास और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की दिशा में एक सकारात्मक एवं प्रेरणादायक पहल के रूप में देखी जा रही है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सहायक अभियंता अजनी राय की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
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