ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर उठे सवाल, दिल्ली हाई कोर्ट ने CBSE और केंद्र से मांगा जवाब

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (08 June 2026): देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने CBSE और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में इस्तेमाल किए गए ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़ा है, जिस पर तकनीकी खामियों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में आई गड़बड़ियों के कारण कई छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिले, जिससे उनके उच्च शिक्षा में प्रवेश और करियर की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति Neena Bansal Krishna और न्यायमूर्ति Madhu Jain की अवकाशकालीन पीठ ने छात्र संगठन National Students’ Union of India की जनहित याचिका पर केंद्र और CBSE से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया कि कई उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन धुंधले थे, कुछ पन्ने अपलोड नहीं हुए, जबकि कई उत्तर सही तरीके से डिजिटल प्रणाली में दर्ज नहीं हो सके। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया प्रभावित हुई और छात्रों के प्राप्तांक वास्तविक प्रदर्शन के अनुरूप नहीं रहे।

सुनवाई के दौरान CBSE ने याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताई। बोर्ड की ओर से कहा गया कि याचिका एक राजनीतिक दल से जुड़े छात्र संगठन द्वारा दायर की गई है और शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। CBSE ने यह भी दावा किया कि छात्रों से प्राप्त शिकायतों का समाधान किया जा रहा है और बोर्ड समस्याओं के प्रति सजग है। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचे बिना सभी पक्षों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

दूसरी ओर, NSUI ने अदालत में तर्क दिया कि यह मामला किसी एक छात्र या सीमित समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों से जुड़ा हुआ है। संगठन की ओर से पेश वकील ने कहा कि राजनीतिक पृष्ठभूमि होने मात्र से किसी संगठन की जनहित याचिका दायर करने की पात्रता समाप्त नहीं हो जाती। याचिका में ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम की स्वतंत्र जांच कराने और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग भी की गई है।

मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के शैक्षिक अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। बोर्ड परीक्षाओं के अंक ही कॉलेज प्रवेश, छात्रवृत्ति और विभिन्न पेशेवर पाठ्यक्रमों का आधार बनते हैं। ऐसे में यदि तकनीकी खामियों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई और CBSE के जवाब पर टिकी हैं।


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