88 फीसदी दिव्यांग हुए मरीन कमांडो को अदालत से बड़ी राहत, 2.46 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (07 June 2026): देश की समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय नौसेना के जांबाज मरीन कमांडो (मार्कोस) लखपत सिंह को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर 88 फीसदी दिव्यांग हुए कमांडो के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 2.46 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि यह हादसा कार चालक की लापरवाही का परिणाम था, जिसकी वजह से एक बहादुर सैनिक का जीवन पूरी तरह बदल गया।

पीठासीन अधिकारी डॉ. अभिलाष मल्होत्रा की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कार चालक की घोर लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई और इसके लिए बीमा कंपनी तथा संबंधित प्रतिवादियों को पीड़ित जवान के इलाज, भविष्य की आय में नुकसान और जीवनभर की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की पूरी राशि अदा करनी होगी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आर्थिक सहायता किसी व्यक्ति के खोए हुए सपनों और शारीरिक पीड़ा की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन उसे सम्मानपूर्वक जीवन जीने का सहारा अवश्य दे सकती है।

यह हादसा 25 दिसंबर 2018 को विशाखापट्टनम के तेलुगु थल्ली फ्लाईओवर पर हुआ था। जानकारी के अनुसार, लखपत सिंह अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार और अनियंत्रित स्विफ्ट कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह सड़क पर दूर जाकर गिरे और उनके शरीर के दाहिने हिस्से में गंभीर चोटें आईं। हाथ, कोहनी, पसलियों और कूल्हे में कई फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लंबे समय तक उनका इलाज चला।

दुर्घटना के बाद लखपत सिंह की हालत बेहद गंभीर बनी रही और उन्हें कई दिनों तक आईसीयू में जीवन और मौत के बीच संघर्ष करना पड़ा। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें एयरलिफ्ट कर सैन्य अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल बोर्ड की जांच में उन्हें 88 फीसदी शारीरिक रूप से दिव्यांग पाया गया और स्थायी रूप से सेवा के लिए अनफिट घोषित कर दिया गया। इसके चलते वह पहले की तरह सक्रिय कमांडो की भूमिका निभाने में असमर्थ हो गए और उनका कार्यक्षेत्र केवल डेस्क जॉब तक सीमित होकर रह गया।

अपने फैसले में अदालत ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच ड्राइवरों की छोटी-सी लापरवाही भी किसी व्यक्ति का पूरा जीवन बर्बाद कर सकती है। अदालत ने टिप्पणी की कि एक गैर-जिम्मेदाराना क्षण ने न केवल लखपत सिंह की व्यक्तिगत और पेशेवर जिंदगी को प्रभावित किया, बल्कि देश को एक प्रशिक्षित और बहादुर मरीन कमांडो की सक्रिय सेवाओं से भी वंचित कर दिया।

यह फैसला सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के अधिकारों और न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत के आदेश से लखपत सिंह को आर्थिक राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि सड़क पर जिम्मेदारी और सावधानी केवल व्यक्तिगत सुरक्षा ही नहीं, बल्कि कई परिवारों और देश के भविष्य से भी जुड़ी होती है। साथ ही यह निर्णय लापरवाही से वाहन चलाने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी माना जा रहा है।


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