नोएडा की दुर्दशा पर DDRWF का सवाल: जर्जर बिजली खंभों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

संजीव कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, DDRWF फेडरेशन

नोएडा (5 जून 2026): नोएडा में हाल ही में आई तेज आंधी और बारिश के बाद कई स्थानों पर बिजली के खंभे गिरने की घटनाओं ने शहर के बिजली ढांचे की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। डीडीआरडब्ल्यूएफ (DDRWF) फेडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) की कार्यप्रणाली और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

संजीव कुमार ने कहा, “महोदय, हम लोग अपनी इन खुली आंखों से ही नोएडा शहर की दुर्दशा देख रहे हैं। नोएडा उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले शहरों में शामिल है, लेकिन यहां बिजली विभाग के बुनियादी ढांचे की स्थिति बेहद चिंताजनक है।”

उन्होंने कहा कि शहर के अनेक सेक्टरों में लगे बिजली के खंभे नीचे से पूरी तरह जंग खाकर गल चुके हैं। इसके बावजूद विभाग उनकी समय पर मरम्मत या प्रतिस्थापन करने के बजाय केवल वेल्डिंग कर अस्थायी समाधान निकालने में विश्वास रखता है।

प्रीवेंटिव मेंटेनेंस की कमी बनी बड़ी समस्या

संजीव कुमार के अनुसार यदि समय-समय पर बिजली के खंभों पर प्राइमर और पेंटिंग का कार्य कराया जाए तो उनकी आयु बढ़ सकती है और जंग लगने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। लेकिन विभाग नियमित रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता।

उन्होंने कहा कि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा बिजली दरों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके अलावा उपभोक्ताओं से विभिन्न प्रकार के शुल्क और कर भी वसूले जाते हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक सवाल है कि बिजली के खंभों और अन्य बुनियादी ढांचे के रखरखाव की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

दुर्घटना होने पर कौन देगा मुआवजा?

संजीव कुमार ने कहा कि यदि कोई जर्जर बिजली खंभा गिरकर किसी मकान, वाहन या व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता है तो प्रभावित परिवारों को मुआवजा प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।

उन्होंने कहा, “यदि यह खंभे हमारे मकानों पर गिरते हैं तो विभाग की ओर से तत्काल कोई मुआवजा नहीं दिया जाता। यहां तक कि जान-माल की हानि होने पर भी लोगों को लंबे मुकदमे और कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।” उन्होंने मांग की कि विभाग दुर्घटना होने का इंतजार करने के बजाय अपने इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी स्वीकार करे और उसे व्यवस्थित तरीके से मेंटेन करे।

आंधी में केवल जर्जर खंभे ही गिरे

DDRWF फेडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष का कहना है कि हाल ही में आई आंधी में केवल वही बिजली खंभे गिरे जो पहले से नीचे से जंग खाकर कमजोर हो चुके थे। उन्होंने कहा, “कल की आंधी में सिर्फ वही खंभे गिरे हैं जो नीचे से गले हुए थे, बाकी सभी मजबूत खंभे अपनी जगह पर खड़े रहे। इससे स्पष्ट है कि समस्या प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि रखरखाव की कमी है।”

सभी सेक्टरों में सर्वे और नंबरिंग की मांग

संजीव कुमार ने बिजली विभाग से मांग की है कि नोएडा के सभी सेक्टरों में लगे बिजली खंभों का व्यापक सर्वे कराया जाए। जंग लगे और कमजोर खंभों की पहचान कर उन्हें तत्काल बदला जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी बिजली खंभों पर पेंटिंग कर उनकी पहचान संख्या (Pole Number) स्पष्ट रूप से लिखी जाए, ताकि निवासी किसी भी खराब या जर्जर खंभे की शिकाय

सानी से दर्ज करा सकें।

उन्होंने कहा, “हमारे घरों के सामने जंग लगे खंभे न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित करते हैं बल्कि गिरने पर मकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए सभी खंभों पर रंग-रोगन और नंबरिंग अनिवार्य की जानी चाहिए।”

कट-फ्री जोन में भी घंटों बिजली कटौती

संजीव कुमार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नोएडा को अपेक्षाकृत कट-फ्री क्षेत्र माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद कई सेक्टरों में घंटों बिजली कटौती होती रहती है।

उन्होंने बताया कि हाल की आंधी के बाद उनके सेक्टर में चार से पांच घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। शहर के अनेक क्षेत्रों से भी लंबे समय तक बिजली गुल रहने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

उन्होंने कहा कि शहर भर में बिजली कटौती का सिलसिला लगातार जारी है और विभाग को इस दिशा में गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बने

DDRWF फेडरेशन ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम से मांग की है कि मानसून से पहले पूरे नोएडा में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाए। जर्जर बिजली खंभों को बदला जाए, नियमित पेंटिंग और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए तथा बिजली आपूर्ति प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाए।

फेडरेशन का कहना है कि नोएडा जैसे राजस्व देने वाले शहर में नागरिकों को सुरक्षित और मजबूत बिजली ढांचा मिलना चाहिए। बिजली विभाग को केवल बिल वसूली तक सीमित न रहकर अपने बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। अब सवाल यह है कि क्या विभाग इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी?


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