सिर्फ कंपनी के भरोसे न रहें: नौकरी से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस कितना सुरक्षित, कितना पर्याप्त?
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (04/06/2026): निजी और सरकारी क्षेत्रों में कार्यरत लाखों कर्मचारियों को उनकी कंपनी या संस्थान की ओर से स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) की सुविधा प्रदान की जाती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश कर्मचारी इस बीमा योजना की शर्तों, कवरेज और सीमाओं को समझे बिना ही उस पर पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं, जो भविष्य में गंभीर आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य बीमा विशेषज्ञों के अनुसार बड़ी संख्या में कर्मचारी यह जानने का प्रयास ही नहीं करते कि कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए हेल्थ इंश्योरेंस में उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं या नहीं। कई मामलों में पति-पत्नी और बच्चों को कवरेज मिलता है, जबकि माता-पिता को अलग से जोड़ना पड़ता है। जानकारी के अभाव में कर्मचारी अपने परिवार को बीमा लाभों से वंचित कर देते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस आमतौर पर नौकरी से जुड़ा होता है। कर्मचारी के इस्तीफा देने, नौकरी बदलने या सेवानिवृत्त होने पर यह सुविधा समाप्त या परिवर्तित हो सकती है। ऐसे में यदि व्यक्ति के पास अलग से व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा नहीं है तो वह अचानक बिना किसी सुरक्षा कवच के रह सकता है।
कई कर्मचारी यह भी नहीं देखते कि कंपनी ने कितनी बीमित राशि (Sum Insured) उपलब्ध कराई है। आज के समय में बड़े शहरों में गंभीर बीमारियों या अस्पताल में भर्ती होने पर उपचार का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में 3 से 5 लाख रुपये का बेसिक कॉर्पोरेट हेल्थ कवर पर्याप्त नहीं माना जाता।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कर्मचारियों को निम्नलिखित बिंदुओं की जानकारी अवश्य रखनी चाहिए—
बीमा की कुल कवरेज राशि कितनी है।
परिवार के किन सदस्यों को कवर किया गया है।
माता-पिता के लिए कवरेज उपलब्ध है या नहीं।
कैशलेस अस्पतालों का नेटवर्क कितना बड़ा है।
पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing Diseases) पर क्या नियम लागू हैं।
नौकरी छोड़ने या सेवानिवृत्ति के बाद बीमा की स्थिति क्या होगी।
कौन-कौन सी बीमारियां और उपचार बीमा के दायरे में शामिल नहीं हैं।
भारत में बढ़ रहा स्वास्थ्य खर्च
स्वास्थ्य क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार भारत में चिकित्सा सेवाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। गंभीर बीमारियों, सर्जरी और लंबी अवधि के उपचार पर लाखों रुपये का खर्च आ सकता है। ऐसे में केवल नियोक्ता (Employer) द्वारा प्रदान किए गए बीमा पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण माना जाता है।
बीमा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को नौकरी से मिलने वाले स्वास्थ्य बीमा की नियमित समीक्षा करनी चाहिए और इसके साथ-साथ एक स्वतंत्र व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी खरीदनी चाहिए। इससे नौकरी बदलने, बेरोजगारी या सेवानिवृत्ति की स्थिति में भी स्वास्थ्य सुरक्षा बनी रहती है और परिवार को वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ता। विशेषज्ञों के अनुसार, कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस एक महत्वपूर्ण सुविधा है, लेकिन इसे पूर्ण सुरक्षा कवच मानना उचित नहीं होगा। दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत बीमा और पर्याप्त कवरेज दोनों आवश्यक हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥
प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति , दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।
टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.
Discover more from टेन न्यूज हिंदी
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
टिप्पणियाँ बंद हैं।