Google को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका, 30 लाख रुपये का जुर्माना

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (31 May 2026): भारत में डिजिटल विज्ञापन जगत को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने टेक दिग्गज Google पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला एक ट्रेडमार्क विवाद से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने माना कि गूगल ने एक पंजीकृत ब्रांड नाम को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल होने दिया और उससे व्यावसायिक लाभ अर्जित किया। इस फैसले को भारत में डिजिटल विज्ञापन और ट्रेडमार्क संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में ऑनलाइन विज्ञापन नीतियों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।

Hindware की शिकायत से शुरू हुआ विवाद

यह कानूनी लड़ाई वर्ष 2013 में शुरू हुई थी, जब सैनिटरीवेयर कंपनी Hindware ने आरोप लगाया कि उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनियां Cera Sanitaryware और Grohe India ने Google Ads के माध्यम से “Hindware” शब्द को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में खरीदा था। इसके परिणामस्वरूप जब कोई उपभोक्ता इंटरनेट पर Hindware सर्च करता था, तो सबसे ऊपर प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विज्ञापन दिखाई देते थे। कंपनी का कहना था कि इससे उसके ग्राहकों को भ्रमित किया जा रहा था और उसके स्थापित ब्रांड मूल्य को नुकसान पहुंच रहा था।

आखिर क्या है Keyword Advertising?

Google Ads की व्यवस्था में विज्ञापनदाता कुछ विशेष शब्दों या वाक्यांशों पर बोली लगाते हैं, जिन्हें कीवर्ड कहा जाता है। जब कोई उपयोगकर्ता उन शब्दों को सर्च करता है, तो संबंधित विज्ञापन परिणामों के ऊपर या साथ में दिखाई देते हैं। यह डिजिटल मार्केटिंग का बेहद लोकप्रिय तरीका है। विवाद तब पैदा होता है जब कोई कंपनी अपने उत्पादों के प्रचार के लिए प्रतिस्पर्धी ब्रांड के नाम को ही कीवर्ड के रूप में खरीद ले। ऐसे में ग्राहक किसी एक ब्रांड को खोज रहा होता है, लेकिन उसके सामने दूसरे ब्रांड का विज्ञापन सबसे पहले आ जाता है।

Hindware ने ट्रेडमार्क उल्लंघन का लगाया आरोप

Hindware का तर्क था कि उसका नाम एक पंजीकृत और प्रतिष्ठित ट्रेडमार्क है, जिसकी पहचान बनाने में वर्षों की मेहनत और निवेश लगा है। कंपनी के अनुसार यदि कोई ग्राहक “Hindware” खोजता है तो उसकी मंशा उसी ब्रांड के उत्पादों तक पहुंचने की होती है। ऐसे में किसी अन्य कंपनी का विज्ञापन सामने आना उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है। Hindware ने अदालत में कहा कि बिना अनुमति उसके ट्रेडमार्क का विज्ञापन संबंधी उपयोग भारतीय ट्रेडमार्क कानून का उल्लंघन है और इससे कंपनी को व्यावसायिक नुकसान पहुंचता है।

Google ने अदालत में रखा अपना पक्ष

सुनवाई के दौरान Google ने दलील दी कि कीवर्ड केवल उसके विज्ञापन सिस्टम के बैकएंड में उपयोग किए जाते हैं और उन्हें सामान्य उपयोगकर्ता सीधे नहीं देख सकता। इसलिए इसे ट्रेडमार्क का वास्तविक उपयोग नहीं माना जाना चाहिए। कंपनी ने यह भी कहा कि सभी प्रायोजित विज्ञापनों के साथ “Ad” या “Sponsored” का स्पष्ट लेबल लगाया जाता है, जिससे उपयोगकर्ता विज्ञापन और सामान्य सर्च परिणामों के बीच अंतर समझ सकते हैं। Google का कहना था कि उसकी नीति विज्ञापन के टेक्स्ट में दूसरे ब्रांड के ट्रेडमार्क के दुरुपयोग की अनुमति नहीं देती।

अदालत ने Google की दलीलों को नहीं माना

दिल्ली हाईकोर्ट ने Google की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि किसी ट्रेडमार्क को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में उपलब्ध कराना भी उसके व्यावसायिक उपयोग की श्रेणी में आता है। अदालत ने टिप्पणी की कि Google प्रतिस्पर्धी कंपनियों को प्रसिद्ध ट्रेडमार्कों पर बोली लगाने की सुविधा देकर आर्थिक लाभ कमा रहा था। न्यायालय ने इसे “फ्री-राइडिंग” की संज्ञा देते हुए कहा कि किसी कंपनी की वर्षों में अर्जित प्रतिष्ठा का लाभ उठाना उचित नहीं है। अदालत ने Google को Hindware से जुड़े शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल होने से रोकने का भी निर्देश दिया।

डिजिटल विज्ञापन उद्योग पर पड़ेगा बड़ा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का प्रभाव केवल Google और Hindware तक सीमित नहीं रहेगा। भारत में हजारों कंपनियां डिजिटल विज्ञापन के लिए कीवर्ड आधारित रणनीतियों का उपयोग करती हैं। यदि अदालत का यह दृष्टिकोण आगे भी कायम रहता है तो कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के नामों पर विज्ञापन चलाना कठिन हो जाएगा। इससे ट्रेडमार्क मालिकों को अधिक सुरक्षा मिलेगी, लेकिन विज्ञापन उद्योग को अपनी रणनीतियों और नीतियों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

आगे बदल सकती हैं Google की विज्ञापन नीतियां

यह फैसला भविष्य में भारत के डिजिटल विज्ञापन ढांचे को प्रभावित करने वाला साबित हो सकता है। यदि उच्च अदालतों में भी यह निर्णय बरकरार रहता है, तो Google समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपनी विज्ञापन नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। इससे ब्रांडों को अपने ट्रेडमार्क की बेहतर सुरक्षा मिलेगी और ऑनलाइन विज्ञापन में पारदर्शिता बढ़ सकती है। साथ ही यह मामला डिजिटल कारोबार, प्रतिस्पर्धा और बौद्धिक संपदा अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस को भी जन्म देगा, जिस पर आने वाले समय में पूरी टेक इंडस्ट्री की नजर रहेगी।


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