CNG Price Hike: दिल्ली-एनसीआर में फिर बढ़े सीएनजी के दाम, आम लोगों पर बढ़ेगा बोझ
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (25 May 2026): दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। मंगलवार से सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। इससे पहले भी पिछले 15 दिनों के भीतर कई बार दाम बढ़ाए जा चुके हैं। सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब सीएनजी के महंगे होने से परिवहन खर्च और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लगातार हो रही इस वृद्धि ने निजी वाहन चालकों के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन से सफर करने वाले यात्रियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की कीमत 83.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी, बसें और कमर्शियल वाहन सीएनजी पर चलते हैं, ऐसे में किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। परिवहन कंपनियों और कैब ऑपरेटरों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिसका बोझ अंततः यात्रियों को उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही तो आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और जरूरी सामानों की ढुलाई भी महंगी हो सकती है।
सीएनजी के दाम बढ़ने की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव को माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल और गैस बाजार में दबाव बढ़ा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले बदलावों का असर सीधे घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और स्थानीय टैक्स भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जियां, किराना और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। महंगाई बढ़ने की स्थिति में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होने की संभावना है। खासकर वे लोग जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं या सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं, उन्हें अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।
इस बीच केंद्र सरकार का कहना है कि वह उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पहले ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर चुकी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि, वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के चलते घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों को नियंत्रित करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
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