लाल किले पर सजेगा ‘मिनी भारत’, जनजातीय संस्कृति के महासंगम में जुटेंगे 1.5 लाख लोग

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (23 May 2026): भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राजधानी दिल्ली 24 मई 2026 को एक ऐतिहासिक और भव्य आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। ‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम’ नाम से आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में देशभर के जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं, लोककला, जीवन मूल्य और भारतीयता की झलक एक साथ दिखाई देगी। आयोजकों के अनुसार यह सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता, गौरव और राष्ट्रीय एकता का महाउत्सव होगा। लाल किले के मैदान में आयोजित होने वाला यह आयोजन दिल्ली में अब तक जनजातीय समाज का सबसे बड़ा जुटान माना जा रहा है, जिसकी तैयारियां कई दिनों से युद्धस्तर पर चल रही हैं।

इस महासमागम में देश के अलग-अलग राज्यों से करीब 1.5 लाख जनजातीय प्रतिनिधियों और समुदाय के लोगों के शामिल होने की संभावना है। खास बात यह है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से भी विशेष प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचेगा। आयोजकों के मुताबिक देशभर की लगभग 750 जनजातियों में से करीब 500 जनजातीय समुदायों की भागीदारी इस कार्यक्रम में देखने को मिलेगी। दिल्ली पहली बार एक ऐसे दृश्य की गवाह बनेगी, जहां जंगलों, पहाड़ों, गांवों और दूरदराज इलाकों से आए जनजातीय समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ राजधानी की सड़कों पर एक साथ नजर आएंगे।

कार्यक्रम के तहत राजधानी दिल्ली के पांच अलग-अलग स्थानों से विशाल शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। इनमें राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदसिया बाग और श्यामगिरि मंदिर शामिल हैं। इन सभी स्थानों से दोपहर बाद जनजातीय समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में यात्रा शुरू करेंगे और अलग-अलग मार्गों से होते हुए लाल किले के मैदान तक पहुंचेंगे। कुल मिलाकर इन शोभायात्राओं की लंबाई करीब 13.3 किलोमीटर होगी। सबसे लंबा मार्ग श्यामगिरि मंदिर से लाल किला तक लगभग 3.5 किलोमीटर का रहेगा, जबकि सबसे छोटा मार्ग कुदसिया बाग से लाल किला तक करीब 2 किलोमीटर का होगा। गर्मी को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग अपेक्षाकृत छोटे रखे गए हैं।

इन शोभायात्राओं में जनजातीय नृत्य, पारंपरिक संगीत, लोक वाद्ययंत्र, सांस्कृतिक झांकियां और विभिन्न राज्यों की अलग-अलग टोलियां आकर्षण का केंद्र होंगी। हर राज्य के प्रतिभागी अपने-अपने बैनर के साथ आगे बढ़ेंगे और अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि गांव से लेकर शहर तक, जंगल से लेकर महानगर तक रहने वाले सभी भारतीय एक साझा सांस्कृतिक धारा से जुड़े हैं। दिल्लीवासियों को पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय समाज की जीवंत संस्कृति को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

पूरा आयोजन लाल किले के मैदान में केंद्रित रहेगा, जहां मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा। यहां देशभर की जनजातीय परंपराओं, लोककला और सांस्कृतिक विविधता की झलक एक मंच पर देखने को मिलेगी। आयोजन समिति के अनुसार इस कार्यक्रम को व्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए विशेष समन्वय समिति बनाई गई है, जबकि लगभग 20 अलग-अलग विभागों का गठन भी किया गया है। देशभर से आने वाले प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए स्कूलों, धर्मशालाओं और अन्य स्थानों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। शुक्रवार से ही विभिन्न राज्यों के जत्थे दिल्ली पहुंचने लगे हैं और यह सिलसिला 24 मई की दोपहर तक जारी रहेगा।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की जा रही है। आयोजकों का कहना है कि दिल्ली में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर जनजातीय संस्कृति को समर्पित आयोजन होने जा रहा है, इसलिए इसे यादगार बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। कार्यक्रम में लगभग 100 विशिष्ट जनजातीय प्रतिनिधि भी एक मंच पर उपस्थित रहेंगे, जिनमें पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्व, चिकित्सक, अधिकारी, अधिवक्ता, समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोग शामिल होंगे।

समागम के दौरान लाल किले के मैदान में जनजातीय समाज की 75 महान विभूतियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक जागरण और देश के विकास में योगदान देने वाले जनजातीय नायकों की तस्वीरें और उनके जीवन परिचय प्रदर्शित किए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि दिल्ली के लोग पहली बार इतने व्यापक रूप में जनजातीय समाज के ऐतिहासिक योगदान से परिचित हो सकेंगे। भगवान बिरसा मुंडा से लेकर अन्य अनेक जनजातीय वीरों की विरासत को इस प्रदर्शनी के माध्यम से देश के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

इस महासमागम का आयोजन जनजाति सुरक्षा मंच और जनजाति जागृति समिति द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। कार्यक्रम से जुड़े लोगों के अनुसार यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का मंच भी बनेगा। विशेष रूप से ‘डिलिस्टिंग’ का मुद्दा इस समागम के केंद्र में रहेगा। मंच की मांग है कि जो लोग अपनी मूल जनजातीय परंपराओं और संस्कृति को छोड़कर अन्य धर्मों में धर्मांतरण कर चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किया जाए। आयोजकों का तर्क है कि धर्मांतरित लोग अल्पसंख्यक और जनजातीय दोनों तरह के लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिससे मूल आदिवासी समुदाय के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

देशभर से इस समागम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग दिल्ली रवाना हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के बभनी क्षेत्र से भी 130 आदिवासी प्रतिनिधियों का जत्था दिल्ली के लिए रवाना हुआ। बताया गया कि सोनभद्र जिले से कुल 650 जनजातीय प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिनके लिए 15 बसों की व्यवस्था की गई है। इसी तरह बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और अन्य राज्यों से भी जत्थे लगातार दिल्ली पहुंच रहे हैं। अंडमान निकोबार से 116 कार्यकर्ताओं का विशेष दल भी नई दिल्ली पहुंचेगा। इस पूरे आयोजन को लेकर जनजातीय समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

24 मई को जब राजधानी दिल्ली की सड़कों पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे हजारों जनजातीय लोग लोक वाद्ययंत्रों की थाप पर नृत्य करते हुए लाल किले की ओर बढ़ेंगे, तब दिल्ली सचमुच ‘मिनी भारत’ का रूप लेती नजर आएगी। यह आयोजन केवल जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, एकता और सनातन परंपरा का विराट उत्सव बनेगा। लाल किले का ऐतिहासिक मैदान उस दिन देश के कोने-कोने से आए जनजातीय समाज की आवाज, संस्कृति और गौरव का साक्षी बनेगा।


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