दिल्ली में घर बनाना होगा सस्ता! संशोधित IFC नीति से राहत
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (22 May 2026): दिल्ली सरकार ने राजधानी में निर्माण कार्य को अधिक किफायती, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने संशोधित IFC (Infrastructure Fund Charges) नीति के तहत कई महत्वपूर्ण राहतों की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि नई नीति का सबसे बड़ा फायदा मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे मकान मालिकों, धार्मिक संस्थाओं और आवासीय कॉलोनियों को मिलेगा। लंबे समय से लोग IFC शुल्क को लेकर राहत की मांग कर रहे थे, जिसके बाद सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि इस कदम से दिल्ली में मकान निर्माण और अतिरिक्त निर्माण कार्य का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा।
नई नीति के तहत अब पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज पूरे प्रिमाइसेस के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक जल आवश्यकता के हिसाब से तय किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे लोगों को अनावश्यक अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा और व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी बनेगी। इसके साथ ही IFC अब केवल नए निर्माण या अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होगा। पहले कई मामलों में पुराने निर्माण पर भी शुल्क को लेकर विवाद होते थे, लेकिन संशोधित नियमों के बाद अब स्पष्टता आने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इस फैसले से आम नागरिकों को राहत मिलेगी और भवन निर्माण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और न्यायसंगत बनेगी।
दिल्ली सरकार ने IFC लागू करने की सीमा में भी बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के अनुसार यह शुल्क केवल 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली संपत्तियों पर ही लागू होगा। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम आय वर्ग वाले इलाकों को विशेष राहत देने के लिए E और F श्रेणी की कॉलोनियों में IFC पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी, जबकि G और H श्रेणी की कॉलोनियों में यह राहत 70 प्रतिशत तक होगी। सरकार का मानना है कि इससे उन परिवारों को बड़ी आर्थिक सहायता मिलेगी जो लंबे समय से मकान निर्माण और अतिरिक्त मंजिल बनाने के लिए भारी शुल्क का सामना कर रहे थे। इस फैसले को राजधानी के रिहायशी इलाकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार ने छोटे परिवारों और मध्यम वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त रियायतों की भी घोषणा की है। नई नीति के तहत 200 वर्गमीटर से अधिक भूखंडों पर बने 50 वर्गमीटर या उससे छोटे आवासीय यूनिट्स को IFC में अतिरिक्त 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इससे छोटे फ्लैट और सीमित आय वाले परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं पंजीकृत धार्मिक स्थलों और धर्मार्थ संस्थाओं को भी अतिरिक्त 50 प्रतिशत रियायत देने का फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं समाज सेवा से जुड़ी होती हैं, इसलिए उन्हें आर्थिक राहत देना जरूरी है। इस घोषणा के बाद कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने Zero Liquid Discharge प्रणाली अपनाने वाले संस्थागत और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी 50 प्रतिशत तक की छूट देने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि इससे जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों को जनता के लिए आसान बनाना और अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना है। नई IFC नीति को राजधानी में निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ा सुधार माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में आवासीय और संस्थागत विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
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