IPL 2026 को लेकर क्या सवाल उठने लगा?

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (17/05/2026): देश में ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर बहस के बीच इंडियन Premier League (IPL) 2026 के आयोजन पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि टूर्नामेंट के शेष मुकाबलों को चुनिंदा स्टेडियमों तक सीमित किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर दर्शकों के बिना आयोजित किया जाए, ताकि हवाई यात्रा और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रमुख व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्रीय खेल मंत्री से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में IPL टीमों, अधिकारियों और सहयोगी स्टाफ की लगातार हवाई आवाजाही से ईंधन की बड़ी मात्रा खर्च हो रही है, जिसे कम किया जा सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि टूर्नामेंट के बचे हुए मैचों के लिए नया कार्यक्रम तैयार किया जाए, जिसमें सीमित शहरों में मुकाबले आयोजित हों। इससे न केवल उड़ानों की संख्या घटेगी, बल्कि आयोजन से जुड़े लॉजिस्टिक खर्चों में भी कमी आएगी। CTI के अनुसार, IPL टीमों द्वारा आमतौर पर चार्टर्ड विमान जैसे बोइंग 737 और एयरबस A320 का उपयोग किया जाता है। ये विमान प्रति घंटे औसतन 2,400 से 3,000 लीटर एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की खपत करते हैं। यदि एक उड़ान की अवधि लगभग दो घंटे मानी जाए, तो एक यात्रा में करीब 5,000 से 6,000 लीटर ईंधन खर्च होता है।

टूर्नामेंट के दौरान टीमों को लगातार अलग-अलग शहरों में यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में कुल ईंधन खपत लाखों लीटर तक पहुंच सकती है। संगठन का तर्क है कि इस खपत को कम करना राष्ट्रीय संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम होगा। संगठन ने यह भी कहा कि प्रत्येक मैच में हजारों दर्शक निजी वाहन, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन से स्टेडियम पहुंचते हैं। इससे पेट्रोल और डीजल की अतिरिक्त खपत होती है। अनुमान है कि एक मैच के दौरान औसतन 40 से 50 हजार दर्शकों की आवाजाही से ईंधन की बड़ी मात्रा खर्च होती है।

ऐसे में यदि कुछ मुकाबले बंद स्टेडियमों में कराए जाएं, तो परिवहन पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है और पर्यावरणीय प्रभाव भी घटेगा। CTI ने अपने पत्र में कोरोना महामारी के दौरान आयोजित IPL का उदाहरण दिया, जब सीमित स्थानों पर सफलतापूर्वक मैच आयोजित किए गए थे। उस दौरान खिलाड़ियों और स्टाफ की आवाजाही नियंत्रित रही और दर्शकों की अनुपस्थिति के बावजूद टूर्नामेंट का प्रसारण सुचारु रूप से हुआ। संगठन का मानना है कि उसी मॉडल को अपनाकर मौजूदा परिस्थितियों में भी टूर्नामेंट को अधिक व्यवस्थित और संसाधन-केंद्रित तरीके से संपन्न कराया जा सकता है।

CTI ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य IPL का विरोध करना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए संसाधनों के बेहतर उपयोग का सुझाव देना है। संगठन का कहना है कि जब देश के विभिन्न क्षेत्र ऊर्जा बचत और लागत नियंत्रण पर जोर दे रहे हैं, तब बड़े आयोजनों में भी जिम्मेदारीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। अब देखना होगा कि खेल मंत्रालय, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और IPL प्रबंधन इस सुझाव पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि प्रस्ताव पर विचार किया जाता है, तो यह खेल आयोजन और राष्ट्रीय संसाधन प्रबंधन के बीच संतुलन का एक नया उदाहरण बन सकता है।


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