दिल्ली में जनवरी से बदल जाएंगे थ्री-व्हीलर रजिस्ट्रेशन के नियम
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (16 May 2026); राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बड़ा बदलाव मिलने जा रहा है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने नया आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में सिर्फ इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर्स को ही प्राथमिकता दी जाएगी। आयोग के अनुसार अब एनसीआर में रजिस्ट्रेशन के लिए केवल इलेक्ट्रिक L5 कैटेगरी के 3-व्हीलर्स को मंजूरी मिलेगी। इस फैसले को राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि पारंपरिक ईंधन से चलने वाले ऑटो और 3-व्हीलर्स वायु प्रदूषण बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करने की रणनीति तैयार की गई है।
नए नियम के तहत Delhi में यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी। इसके बाद एनसीआर के प्रमुख शहरों Gurugram, Faridabad, Sonipat, Ghaziabad और Gautam Buddha Nagar में यह नियम 1 जनवरी 2028 से लागू किया जाएगा। वहीं बाकी एनसीआर जिलों में इसे 1 जनवरी 2029 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे धीरे-धीरे पारंपरिक सीएनजी और डीजल 3-व्हीलर्स की संख्या कम होगी। हालांकि आम लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि इलेक्ट्रिक ऑटो की संख्या बढ़ने से किराए और यात्रा खर्च पर क्या असर पड़ेगा।
सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक और बड़ा फैसला लेते हुए “नो पीयूसी, नो फ्यूल” नियम को सख्ती से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। पूरे एनसीआर में 1 अक्टूबर 2026 से जिन वाहनों के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या सीएनजी नहीं मिलेगी। प्रशासन के अनुसार पेट्रोल पंपों और गैस स्टेशनों को इस आदेश का सख्ती से पालन करना होगा। केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के मुताबिक हर वाहन के लिए रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद वैध पीयूसी प्रमाण पत्र रखना अनिवार्य है। सरकार का दावा है कि बड़ी संख्या में बिना वैध प्रमाण पत्र वाले वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, जिससे प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि राजधानी में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। सरकार का मानना है कि यदि इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर बढ़ता है तो इससे ईंधन खर्च में कमी आएगी और यात्रियों को लंबे समय में राहत मिल सकती है। हालांकि शुरुआती दौर में ऑटो चालकों के सामने नई गाड़ियां खरीदने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं। परिवहन विभाग अब इन बदलावों को लागू करने के लिए विस्तृत योजना तैयार कर रहा है।
इसी बीच दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा संचालन को लेकर भी नया नियम लागू किया है। अब कोई भी व्यक्ति अपने नाम पर एक से अधिक ई-रिक्शा नहीं खरीद सकेगा। यानी एक लाइसेंस पर सिर्फ एक ही ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन संभव होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम उन लोगों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है जो कई ई-रिक्शा खरीदकर उन्हें किराए पर चलवाते थे। प्रशासन का दावा है कि इस फैसले से वास्तविक जरूरतमंद ड्राइवरों को सीधा लाभ मिलेगा और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने ई-रिक्शा चालकों के लिए ट्रेनिंग और फिटनेस सर्टिफिकेट भी अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार इससे सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और अनियमित तरीके से चल रहे वाहनों पर नियंत्रण लगेगा। राजधानी में लगातार बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक दबाव के बीच सरकार के इन फैसलों को बड़े परिवहन सुधार के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर यह बदलाव आम जनता, ड्राइवरों और परिवहन व्यवस्था पर कितना असर डालता है।
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