प्रदूषण के दो खर और दूषण हैं, पहला एविएशन और दूसरा रेलवे: अनिल सूद | Ten Talks

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (16 मई 2026): “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सुशासन” की अवधारणा, उसकी चुनौतियों तथा संभावनाओं पर व्यापक विमर्श को केंद्र में रखते हुए टेन न्यूज नेटवर्क (Ten News Network) द्वारा नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया (Constitution Club of India) में एक विचारोत्तेजक एवं बहुआयामी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों, विधिवेत्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता कर दिल्ली के समक्ष उपस्थित विविध समस्याओं, चुनौतियों एवं उनके व्यावहारिक समाधानों पर गंभीर मंथन किया।

कार्यक्रम में प्रदूषण, अपराध नियंत्रण, लोक प्रशासन, एनडीएमसी एवं एमसीडी में सुशासन, नागरिक सहभागिता तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में आरडब्ल्यूए की भूमिका जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित चर्चा की गई। संवाद के दौरान वक्ताओं ने न केवल समस्याओं का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया, अपितु सुशासन की स्थापना हेतु दूरदर्शी, व्यवहारिक एवं जनकल्याणकारी उपायों का भी उल्लेख किया, जिससे यह कार्यक्रम दिल्ली के भविष्य के लिए एक सार्थक वैचारिक पहल सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के तौर पर उपस्थित एसपी चेतना के अध्यक्ष अनिल सूद ने कहा कि पिछले 3 सालों में जो रिल्स हमें बताती हैं फेसबुक, ट्विटर तथा न्यूज़ के माध्यम से कि दिल्ली का सुशासन न्याय प्रशासन और जन कल्याण पर आधारित है। वहीं पिछले 3 सालों में न्यूज़ आई है कि, दिल्ली विश्व के 95 हॉटस्पॉट में से एक है और आउट ऑफ इंडिया के हंड्रेड शहरों में से दिल्ली का स्थान भी है।

हाल ही में कैग की रिपोर्ट आई है कि दिल्ली के 55% भूमिगत जल कैंटोनमेंट हो गए हैं। यही सुशासन है? जिस राज्य में पिछले कई सालों से हर एक घंटे में तीन पेड़ काटे गए है और दिल्ली को हॉटस्पॉट बना दिया गया तथा आयरन आइलैंड बनकर रह गया है। इसी दिल्ली में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को पता नहीं है कि पिछले 6 सालों में जो 91000 पेड़ काटे गए वे बाद में कहां लगाए गए और इन्हीं 6 साल में 2 करोड़ 40 लाख रुपए रिकवर किए गए कंपनसेशन के तौर पर वह कहाँ गए।

उन्होंने कहा कि प्रदूषण के दो खर और दूषण है, पहला एविएशन और दूसरा रेलवे। जबकि आईआईटी कानपुर कहता है कि यह दोनों ही प्रदूषण नहीं करते जोकि कंटेंपरेरी है MoEF के अनुसार, बाकि जो भस्मासुर है प्रदूषण के थर्मल पावर प्लांट, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, सेनेटरी लैंडफिल, रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप। यहां पर न सीपीसीबी न डीपीसीसी और न ही IIT प्रदूषण को मॉनिटर करता है। आगे उन्होंने कहा कि जी-20 के दौरान फ्लाइट कैंसिल कर दी गई, 300 से ज्यादा ट्रेन भी डायवर्ट कर दी गई क्यों, क्योंकि दिल्ली में AQI को कम रखा जाए। क्या हम दिल्ली के आम लोग कम AQI को डिजर्व नहीं करते। हमने कौन सा ऐसा गुनाह कर दिया कि हमें कम AQI में नहीं रहना चाहिए। यह हमारी सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं है बल्कि हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा है।

दिल्ली के प्रदूषण की बात करें तो बड़ा शोर मचाया जाता है हर साल कि आपकी गाड़ी प्रदूषण करती है आपको गिल्टी फील कराया जाता है। आपको यह नहीं बताया जाता कि दिल्ली की सड़कों की चौड़ाई कम हो रही है। जहां जाम लगने की वजह से खड़ी गाड़ियों के चलते प्रदूषण फैलता है और दिल्ली प्रदूषित होती है।

उल्लेखनीय है कि इस सकारात्मक एवं अत्यंत सारगर्भित विमर्श में दिल्ली नगर निगम की डिप्टी मेयर मोनिका पंत, दिल्ली नगर निगम स्टैंडिंग कमिटी की चेयरमैन सत्या शर्मा, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज न्यायमूर्ति एम. एल. मेहता, स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर एवं स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवोम मिश्रा, सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक एवं उपराज्यपाल दिल्ली के पूर्व ओएसडी शांतनु सेन, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ आदिश सी अग्रवाला, वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ ए.पी. सिंह, एसपी चेतना के अध्यक्ष अनिल सूद, एमिटी यूनिवर्सिटी की Addl Pro VC तनु जिंदल, सेव आवर सिटी से राजीव काकरिया, पूर्वी दिल्ली आरडब्ल्यूए फेडरेशन से बी. एस. वोहरा, HHEWA के अध्यक्ष सीपी शर्मा, संयुक्त आरडब्ल्यूए फोरम के महासचिव पंकज अग्रवाल, CORWA के एन पी सिंह, समाजसेवी नेहा पुरी सहित अनेक विशिष्ट विद्वान, समाजसेवी, विधिवेत्ता, शिक्षाविद् एवं प्रबुद्ध अतिथिगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की विशेष महत्ता इस तथ्य से भी परिलक्षित हुई कि इसमें राजधानी दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे सैकड़ों जागरूक एवं चिंतनशील नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर संवाद को और अधिक सारगर्भित, जनोन्मुख एवं उद्देश्यपूर्ण बनाया। चर्चा के दौरान उपस्थित वक्ताओं एवं नागरिकों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के समक्ष विद्यमान समस्याओं एवं चुनौतियों पर गंभीर विमर्श करते हुए सुशासन, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं जनसहभागिता आधारित समाधान की दिशा में अपने बहुमूल्य विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। यह संवाद निःसंदेह दिल्ली के सर्वांगीण, संतुलित एवं जनकल्याणकारी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक पहल सिद्ध हुआ।।


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