21 साल, 10 कार्यकाल: कितना बदला बिहार

रंजन अभिषेक (संवाददाता)

Bihar News (19 अप्रैल 2026): बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। राज्य को पहली बार सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) के रूप में बीजेपी का मुख्यमंत्री मिला है, जबकि करीब 21 साल तक सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अब सक्रिय राज्य राजनीति से दूरी बनाकर राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ चुके हैं। “सुशासन बाबू” के नाम से पहचान बनाने वाले नीतीश कुमार ने अपने लंबे कार्यकाल में ऐसे कई फैसले लिए, जिन्होंने बिहार की दिशा और दशा दोनों को गहराई से प्रभावित किया।

7 दिन से शुरू हुआ लंबा सफर

3 मार्च 2000 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का शुरुआती कार्यकाल भले ही महज 7 दिन का रहा, लेकिन 24 नवंबर 2005 से शुरू हुआ उनका असली शासनकाल बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। उन्होंने कुल 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया और राज्य की राजनीति में स्थायित्व का चेहरा बने रहे।

कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में बदलाव

नीतीश सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में कानून-व्यवस्था में सुधार को प्रमुख माना जाता है। उनके पहले कार्यकाल में ही अपराध पर सख्ती दिखाई गई, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए और जनता का भरोसा फिर से शासन पर कायम हुआ। इसके साथ ही सड़कों और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम हुआ- गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ा गया, पुल-पुलियों का निर्माण हुआ और कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

बिजली और शिक्षा में नई रोशनी

बिजली के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया। “हर घर बिजली” अभियान के तहत राज्य के लगभग हर गांव तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे जीवन स्तर और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली। शिक्षा के क्षेत्र में साइकिल योजना, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं ने खासकर लड़कियों की स्कूल उपस्थिति में बड़ा इजाफा किया।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी नीतीश सरकार ने अहम कदम उठाए। पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया और स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा मिला। वर्ष 2016 में लागू की गई शराबबंदी को सामाजिक सुधार के बड़े कदम के रूप में देखा गया, हालांकि इस पर समय-समय पर बहस भी होती रही।

योजनाओं से विकास की रफ्तार

इसके अलावा “सात निश्चय योजना” के जरिए नल का जल, गली-नाली, कौशल विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर काम हुआ। स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में शौचालय निर्माण, टीकाकरण अभियान और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयास किए गए। कृषि और ग्रामीण विकास के तहत सिंचाई योजनाओं और किसानों के लिए विभिन्न सहायता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया।

प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता

प्रशासनिक सुधारों के तहत RTPS (Right to Public Service) कानून लागू कर सरकारी सेवाओं को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया। इन सभी पहलों ने बिहार को एक नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संघर्ष से शिखर तक का सफर

पटना के बख्तियारपुर में जन्मे नीतीश कुमार का सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर राज्य की सत्ता के शिखर तक पहुंचा। छात्र राजनीति से लेकर जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में सक्रिय भूमिका और आपातकाल के दौरान संघर्ष ने उनके राजनीतिक जीवन को दिशा दी। शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे बिहार की राजनीति के “चाणक्य” बन गए।

अब नजरें भविष्य पर

अब जब नीतीश कुमार राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका निभाने की तैयारी में हैं, वहीं बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में बिहार विकास की इस रफ्तार को कैसे आगे बढ़ाता है।।


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