“नारी शक्ति को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना समय की मांग” | 10 प्वाइंट्स में पढ़ें पीएम का संबोधन

टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News (16 अप्रैल 2026): लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत के विजन पर विस्तृत संबोधन दिया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए सभी दलों से राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की अपील की।

10 मुख्य बिंदुओं में विस्तृत भाषण:

1. ऐतिहासिक अवसर और लोकतंत्र की धरोहर:

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ विशेष पल आते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अमानत बन जाते हैं। यह वही अवसर है, जब संसद एक ऐसा निर्णय लेने जा रही है, जो भारत के लोकतंत्र को नई दिशा देगा और इसे और मजबूत बनाएगा।

2. वर्षों की देरी पर आत्ममंथन:

उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह का महत्वपूर्ण कदम 25-30 साल पहले ही उठाया जाना चाहिए था। अगर ऐसा होता, तो आज तक इसमें सुधार और परिपक्वता आ चुकी होती। लेकिन अब भी यह अवसर है कि हम देरी को सुधार में बदलें।

3. भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का गौरव:

पीएम ने भारत को “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” बताते हुए कहा कि हमारी हजारों साल पुरानी लोकतांत्रिक यात्रा में यह एक नया आयाम जोड़ने का समय है। यह केवल कानून नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

4. महिलाओं की भागीदारी को समय की मांग बताया:

उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की 50% आबादी को नीति निर्धारण से दूर रखना अब संभव नहीं है। “सबका साथ, सबका विकास” तभी सार्थक होगा जब महिलाओं को समान अवसर और भागीदारी मिलेगी।

5. राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठने की अपील:

प्रधानमंत्री ने विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों से कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक फायदे या नुकसान के तराजू में न तौलें। यह निर्णय किसी एक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और लोकतंत्र के लिए है।

6. विरोध करने वालों के लिए सख्त संदेश:

उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है, जिन लोगों ने महिला आरक्षण या उनके अधिकारों का विरोध किया, उन्हें जनता ने सख्ती से नकारा है। इसलिए राजनीतिक समझदारी इसी में है कि सभी इसका समर्थन करें।

7. ग्रासरूट स्तर पर उभरी महिला शक्ति:

पीएम ने बताया कि पिछले 25-30 वर्षों में पंचायत स्तर पर लाखों महिलाएं नेतृत्व में आई हैं, जिनमें अब राजनीतिक समझ और आत्मविश्वास विकसित हो चुका है। ये महिलाएं अब सिर्फ भागीदारी नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में बराबरी चाहती हैं।

8. संविधान की ताकत और व्यक्तिगत अनुभव:

अपने जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक साधारण और पिछड़े समाज से आने वाला व्यक्ति भी संविधान की ताकत से देश का नेतृत्व कर सकता है। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।

9. हर क्षेत्र में महिलाओं का बढ़ता योगदान:

उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, खेल, प्रशासन, राजनीति और हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। ऐसे में उन्हें नीति निर्धारण से बाहर रखना उनके साथ अन्याय होगा और देश के विकास में बाधा बनेगा।

10. सर्वसम्मति से निर्णय की अपील:

अंत में प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से आग्रह किया कि इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया जाए। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति या पार्टी को नहीं, बल्कि पूरे सदन और देश को मिलना चाहिए।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन केवल एक विधेयक पर चर्चा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला संदेश था। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति की भागीदारी से ही लोकतंत्र मजबूत होगा और विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा।।


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