“जितना बड़ा विरोध होगा, उतनी बड़ी सफलता भी मिल सकती है”: Anand Kumar, संस्थापक Super 30 | Galgotias University

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (15/04/2026): देश के प्रसिद्ध गणितज्ञ, शिक्षाविद और Super 30 के संस्थापक आनंद कुमार (Anand Kumar) ने ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया विश्वविद्यालय (Galgotias University) में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा, संघर्ष, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के विषय पर अपने अनुभव साझा किए और युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियाँ ही किसी व्यक्ति को असली मायनों में मजबूत बनाती हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत में आनंद कुमार ने विश्वविद्यालय के सीईओ ध्रुव गलगोटिया (Dhruv Galgotia), प्रोफेसरों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्र ही भारत का भविष्य हैं और आने वाले समय में वही देश की दिशा तय करेंगे।

चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए

अपने संबोधन के दौरान आनंद कुमार ने कहा कि जब उन्हें विश्वविद्यालय में छात्रों से मिलने का निमंत्रण मिला तो कुछ लोगों ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें इस कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए। कई लोगों ने कहा कि इससे उनकी छवि प्रभावित हो सकती है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा छात्रों का मनोबल बढ़ाना और उन्हें सही दिशा देना रहा है, इसलिए उन्होंने यह निमंत्रण स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि किसी संस्था या व्यक्ति के जीवन में मुश्किल समय आ सकता है, लेकिन उस समय डरने या पीछे हटने की बजाय आगे बढ़कर परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। प्रसिद्ध शिक्षक आनन्द कुमार ने छात्रों से कहा कि अगर जीवन में आलोचना या विरोध हो रहा है तो उसे नकारात्मक रूप में नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखना चाहिए।

आनंद कुमार ने अपने पिता की सीख साझा करते हुए कहा कि यदि जीवन में बड़े-बड़े विरोधी सामने आते हैं तो यह संकेत होता है कि व्यक्ति भविष्य में बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा, जितना बड़ा विरोध होगा, उतनी बड़ी सफलता भी मिल सकती है।

‘कर भला तो हो भला’ का जीवन मंत्र

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को मुफ्त शिक्षा देने की पहल शुरू की, तब उनके पिता ने उन्हें एक सरल लेकिन गहरी बात कही थी “कर भला तो हो भला।” इसी विचार ने उन्हें समाज के लिए काम करने की प्रेरणा दी।

आनंद कुमार ने बताया कि उनके संस्थान Super 30 में आज भी ऐसे छात्रों को पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा, आवास और भोजन की सुविधा दी जाती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं लेकिन पढ़ाई में प्रतिभाशाली होते हैं। इस पहल के माध्यम से सैकड़ों छात्रों ने आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया है।

कैंब्रिज से मिला निमंत्रण लेकिन आर्थिक तंगी बनी बाधा

अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए आनंद कुमार ने बताया कि छात्र जीवन में उन्हें प्रतिष्ठित कैंब्रिज विश्वविद्यालय (University of Cambridge) से उच्च शिक्षा के लिए निमंत्रण मिला था। यह उनके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी और पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण था।

लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे कैंब्रिज नहीं जा सके। उसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया और परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने बताया कि उस समय परिवार की स्थिति इतनी कठिन थी कि उन्हें अपनी माता के साथ मिलकर घर चलाने के लिए पापड़ बनाकर बेचने पड़े। उन्होंने कहा कि वे पटना की गलियों में “ले लो आनंद पापड़” कहकर पापड़ बेचा करते थे। लेकिन उन्होंने कभी अपने सपनों को नहीं छोड़ा और लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे।

सीमित संसाधनों में भी सीखने का जुनून

आनंद कुमार ने बताया कि कुछ समय बाद उन्होंने कोचिंग संस्थानों में गणित पढ़ाना शुरू किया। धीरे-धीरे थोड़ी आय होने लगी। उन्होंने कहा कि उस समय जब उनके पास थोड़ा पैसा आया तो उन्होंने घर की मरम्मत कराने या अन्य सुविधाओं पर खर्च करने के बजाय सबसे पहले एक कंप्यूटर खरीदा।

आनंद कुमार ने बताया कि उस समय बिहार में बहुत कम लोगों के पास कंप्यूटर और इंटरनेट था। उन्होंने स्वयं किताबों के माध्यम से कंप्यूटर चलाना सीखा और इंटरनेट के जरिए दुनिया भर में हो रहे शोध और तकनीकी विकास के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में प्रतिस्पर्धा केवल एक कॉलेज या शहर तक सीमित नहीं है। छात्रों को यह समझना चाहिए कि उनका मुकाबला केवल अपने आसपास के छात्रों से नहीं बल्कि पूरी दुनिया के प्रतिभाशाली युवाओं से है। इसलिए उन्हें वैश्विक स्तर पर होने वाले नवाचारों और शोधों पर लगातार नजर रखनी चाहिए।

अभिषेक राज की कहानी से दी प्रेरणा

अपने भाषण के दौरान आनंद कुमार ने अपने छात्र अभिषेक राज की प्रेरणादायक कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि अभिषेक बेहद गरीब परिवार से थे। उनके पिता बेरोजगार थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उनकी मां गांव के बच्चों को पढ़ाकर किसी तरह घर चलाती थीं।

अभिषेक ने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, जहां बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं थीं। कई बार उन्हें किताबें उधार लेकर पढ़ना पड़ता था। दसवीं कक्षा की परीक्षा के लिए फोटो खिंचवाने तक के पैसे उनके पास नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अच्छे अंक प्राप्त किए। इंजीनियर बनने का सपना लेकर वे पटना पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें कोई सहारा नहीं मिला। मजबूरी में वे एक वकील के घर की सीढ़ियों के नीचे रहते थे और रात में रेस्टोरेंट में काम करते थे।

एक रात देर से पढ़ाई करते हुए उनकी मुलाकात आनंद कुमार से हुई। उनकी मेहनत और लगन देखकर आनंद कुमार ने उन्हें सुपर 30 में शामिल कर लिया। कड़ी मेहनत के बाद अभिषेक ने पहली ही कोशिश में Indian Institute of Technology Kharagpur में प्रवेश प्राप्त किया। आज अभिषेक राज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर चुके हैं और कई देशों में अनुभव प्राप्त करने के बाद पिछले कई वर्षों से वैश्विक तकनीकी कंपनी Dassault Systèmes में उच्च पद पर कार्यरत हैं।

शशि नारायण की कहानी से दिया हौसले का संदेश

आनंद कुमार ने अपने एक अन्य छात्र शशि नारायण की कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद धैर्य और दृढ़ संकल्प से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। शशि के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और उनके भाई ने आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर ली थी। इसके बावजूद शशि ने पढ़ाई जारी रखी। अंग्रेजी भाषा की सीमित समझ और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत करते रहे। अंततः उन्हें Indian Institute of Technology Kharagpur में प्रवेश मिला।

बाद में उन्होंने इतनी मेहनत की कि आईआईटी खड़गपुर में पहले वर्ष में ही रिकॉर्ड अंक हासिल कर इतिहास बना दिया।

शिक्षा से बदल सकती है जिंदगी

अपने संबोधन के अंत में आनंद कुमार ने छात्रों से कहा कि, शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करते रहें तो वे अपनी किस्मत बदल सकते हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे नकारात्मक परिस्थितियों से डरने के बजाय उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार करें और निरंतर मेहनत करते रहें। उनके अनुसार, जो छात्र विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस रखते हैं, वही भविष्य में समाज और देश का नेतृत्व करते हैं।।


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