शारदा हेल्थकेयर में 17 साल पुरानी जबड़े की समस्या का सफल इलाज, केन्या की महिला को मिली नई जिंदगी

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (17/03/2026): आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता का एक उल्लेखनीय उदाहरण सामने आया है, जहां शहर के शारदा हेल्थकेयर-हेल्थसिटी में केन्या की 44 वर्षीय महिला का अत्यंत जटिल जबड़ा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। इस सर्जरी के बाद मरीज को करीब 17 वर्षों से चली आ रही गंभीर समस्या से राहत मिली है और वह अब सामान्य जीवन की ओर लौट सकी हैं।

नैरोबी निवासी एलिस वांगुई मुथोनी लंबे समय से टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (टीएमजे) से जुड़ी गंभीर विकृति से जूझ रही थीं। यह समस्या उनके निचले जबड़े में विकसित हुए ट्यूमर के कारण उत्पन्न हुई थी, जिसने समय के साथ उनके चेहरे की संरचना और जबड़े की कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर दिया।

डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे ट्यूमर कभी-कभी कैंसरयुक्त भी हो सकते हैं, जबकि कई मामलों में यह गैर-कैंसरयुक्त होते हैं। लेकिन दोनों ही स्थितियों में ये हड्डियों, मुलायम ऊतकों या दांतों के विकास से जुड़े ऊतकों को प्रभावित करते हुए जटिलताएं पैदा कर सकते हैं।

समय के साथ एलिस की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उन्हें मुंह खोलने में अत्यधिक कठिनाई होने लगी, खाना चबाना लगभग असंभव हो गया और स्पष्ट रूप से बोल पाना भी चुनौती बन गया। चेहरे का संतुलन बिगड़ने से उनके आत्मविश्वास पर भी गहरा असर पड़ा।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पहले तीन बार सर्जरी करवाई, लेकिन कोई स्थायी लाभ नहीं मिला। उल्टा, एक ऑपरेशन के दौरान निचले होंठ की नस प्रभावित हो गई, जिससे समस्या और जटिल हो गई। लंबे समय तक समाधान की तलाश के बाद एलिस ने भारत का रुख किया, जहां ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा हेल्थकेयर-हेल्थसिटी में उनका उन्नत तकनीक के जरिए इलाज किया गया।

मरीज का इलाज क्रेनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. रोहित पुंगा की देखरेख में किया गया। उन्होंने बताया कि इस तरह की सर्जरी अत्यंत जटिल होती है और इसके लिए पहले विस्तृत जांच और सटीक योजना बनाना अनिवार्य होता है।

मरीज के जबड़े की संरचना को समझने के लिए सीटी स्कैन और थ्री-डी तकनीक का सहारा लिया गया। इसके आधार पर एक विशेष कस्टमाइज्ड इम्प्लांट तैयार किया गया, जो मरीज की शारीरिक बनावट के अनुरूप था। सर्जरी के दौरान जबड़े के क्षतिग्रस्त हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाकर उसकी जगह कृत्रिम जोड़ स्थापित किया गया। इस इम्प्लांट को टाइटेनियम स्क्रू की मदद से खोपड़ी के आधार और निचले जबड़े से मजबूती से जोड़ा गया, जिससे जोड़ की स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट रिप्लेसमेंट चिकित्सा जगत की चुनिंदा और अत्यंत चुनौतीपूर्ण सर्जरी में शामिल है। यह सुविधा दुनिया के सीमित क्रेनियो-मैक्सिलोफेशियल केंद्रों पर ही उपलब्ध है। डॉ. पुंगा के अनुसार, हर मरीज का मामला अलग होता है, खासकर तब जब वह पहले कई सर्जरी करवा चुका हो। ऐसे में सर्जरी की योजना और क्रियान्वयन दोनों में अत्यधिक सटीकता और अनुभव की आवश्यकता होती है।

सफल ऑपरेशन के बाद एलिस अब बिना दर्द के खाना खा पा रही हैं, स्पष्ट रूप से बोल पा रही हैं और उनका चेहरा भी काफी हद तक संतुलित हो गया है। लंबे समय से चली आ रही शारीरिक और मानसिक पीड़ा से राहत मिलने के बाद वह सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं। यह सर्जरी न केवल चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्ध उन्नत तकनीकों का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जटिल से जटिल बीमारियों का समाधान अब संभव होता जा रहा है, बशर्ते सही समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सके।


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