ईरान–इजरायल युद्ध से बढ़ा गैस संकट, MSME उद्योगों पर मंडराया खतरा: IBA अध्यक्ष अमित उपाध्याय

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (12 /03/2026): ईरान–इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव अब देश के MSME उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष Amit Upadhyay ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में एलपीजी और कमर्शियल गैस की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने उत्पादन जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने बताया कि पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, सिलिकॉन स्प्रे और अन्य कई विनिर्माण इकाइयां कमर्शियल LPG और PNG गैस पर आधारित हैं। पिछले दो दिनों से कई औद्योगिक क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें मिल रही हैं, जिसके कारण कई फैक्ट्रियां आंशिक रूप से बंद हैं और कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

अमित उपाध्याय ने कहा कि बाजार में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी की भी शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। यदि छोटे उद्योग महंगे दामों पर गैस खरीदने को मजबूर होते हैं तो उनकी उत्पादन लागत इतनी बढ़ जाती है कि उनका लाभ लगभग समाप्त हो जाता है। दूसरी ओर यदि उद्योग बंद होते हैं तो फैक्ट्री का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन और बैंक की किश्त जैसे स्थायी खर्च उद्योगों के लिए गंभीर संकट पैदा कर देते हैं।

आगे उन्होंने कहा कि देश के हजारों उद्योगों ने लाखों रुपये खर्च कर PNG पाइपलाइन कनेक्शन लिया था, ताकि उन्हें स्थिर और किफायती ऊर्जा मिल सके, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में PNG आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसका असर होटल इंडस्ट्री और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले छोटे खाद्य प्रतिष्ठानों पर भी पड़ रहा है। यदि ये प्रतिष्ठान बंद होते हैं तो वहां कार्यरत मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था प्रभावित होगी, जिससे श्रमिकों की उपलब्धता और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। आगे उन्होंने कहा कि कच्चे तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि के कारण पॉलीमर सहित कई रॉ-मैटेरियल्स के दाम 40 से 45 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है और उद्योगों में अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।

अमित उपाध्याय ने कहा कि MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि के बाद यही क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है और देश की जीडीपी तथा निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है। अकेले उत्तर प्रदेश में ही 96 लाख से अधिक MSME इकाइयां कार्यरत हैं, जो लगभग 3 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही हैं। अंत में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि LPG और PNG गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो तथा MSME उद्योगों को ऊर्जा लागत में राहत देने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं, ताकि उद्योगों की उत्पादन गतिविधियां और रोजगार सुरक्षित रह सकें।।


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