IIT दिल्ली की बड़ी पहल ‘आदि वाणी’ जनजातीय भाषाओं को मिला देश का पहला एआई ट्रांसलेशन टूल

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (22 February 2026): देश में पहली बार जनजातीय समाज की भाषाई जरूरतों को केंद्र में रखकर एक विशेष एआई आधारित ट्रांसलेशन टूल ‘आदि वाणी’ विकसित किया गया है। यह पहल IIT दिल्ली के स्कूल ऑफ एआई और भगवान बिरसा मुंडा सेल की संयुक्त परियोजना है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स का सहयोग प्राप्त है। हाल ही में इस टूल को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं से सराहना मिली। ‘आदि वाणी’ विशेष रूप से संथाली, भीली, गोंडी और मुंडारी जैसी जनजातीय भाषाओं के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें हिंदी और अंग्रेजी में अनुवादित किया जा सकता है।

परियोजना से जुड़े शाश्वत भारद्वाज के अनुसार, ‘आदि वाणी’ पारंपरिक तकनीकी मॉडल से अलग सोच के साथ विकसित की गई है। आमतौर पर पहले एआई समाधान तैयार होते हैं और बाद में उन्हें समाज में लागू किया जाता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में पहले जनजातीय समुदायों की जरूरतों को समझा गया। उसी आधार पर तकनीक को डिजाइन किया गया, जिससे यह “कम्युनिटी ड्रिवन और कम्युनिटी जनरेटेड एआई” का उदाहरण बन सका। इस प्रक्रिया में समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई, जिससे टूल अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बन पाया।

‘आदि वाणी’ ऐप मल्टीलिंगुअल और मल्टी-डायरेक्शनल ट्रांसलेशन की सुविधा देता है। डेमो के दौरान दिखाया गया कि भीली भाषा में लिखे गए टेक्स्ट को एक क्लिक में हिंदी में बदला जा सकता है, वहीं हिंदी या अंग्रेजी से जनजातीय भाषाओं में भी अनुवाद संभव है। ऐप में टेक्स्ट ट्रांसलेटर, वॉइस ट्रांसलेटर, ओसीआर ट्रांसलेटर और फाइल ट्रांसलेटर जैसे चार प्रमुख फीचर्स शामिल हैं। ये सुविधाएं प्रशासनिक कार्यों, शिक्षा और दैनिक संवाद को सरल बनाने में सहायक हो सकती हैं।

भारत जैसे बहुभाषी देश में कई जनजातीय भाषाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म से दूर रही हैं। ऐसे में ‘आदि वाणी’ केवल अनुवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भाषाई संरक्षण का भी एक प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी भाषा को डिजिटल पहचान मिलती है, तो उसका अस्तित्व और भविष्य दोनों मजबूत होते हैं। यह टूल पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच सेतु का काम कर सकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए भाषाई विरासत सुरक्षित रह सके।

फिलहाल अलग-अलग भाषाओं के लिए अलग एआई मॉडल का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन टीम भविष्य में “यूनिफाइड लैंग्वेज मॉडल” विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य एक ऐसा सिंगल मॉडल तैयार करना है, जो सभी भाषाओं में हर दिशा में अनुवाद करने में सक्षम हो। साथ ही गारो, कुई और अन्य जनजातीय भाषाओं को भी इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना है, जिससे इसका दायरा और व्यापक हो सके।

शिक्षा क्षेत्र में भी ‘आदि वाणी’ को बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। दूरदराज के जनजातीय इलाकों में अक्सर शिक्षक और छात्र अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि से होते हैं, जिससे संवाद में बाधा आती है। ऐसे में इस टूल को लर्निंग ऐप के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि शिक्षक स्थानीय भाषा जल्दी सीख सकें और छात्रों से बेहतर संवाद स्थापित कर सकें। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में समावेशी विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।।


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