1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर अधिनियम, करदाताओं को मिलेगी बड़ी राहत

टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News (17/02/2026): वित्त बजट 2026 के माध्यम से भारत सरकार (Government of India) ने कर प्रणाली में युगांतकारी परिवर्तन करने की घोषणा की है, जिससे देश के लाखों व्यापारियों और ईमानदार करदाताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने) वाला नया आयकर अधिनियम (New Income Tax Act न केवल दशकों पुराने जटिल कानूनों को सरल बनाएगा, बल्कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार सुगमता) को भी बढ़ावा देगा। इसी संदर्भ में हाल ही में आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में ‘द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) द्वारा एक विशेष सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने बजट के दूरगामी प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

सेमीनार के दौरान मुख्य वक्ता सीए विनोद गुप्ता ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल से प्रभावी होने वाला ‘आयकर अधिनियम 2025’ कर चोरी रोकने और अनुपालन को सरल बनाने पर केंद्रित है। नए नियमों के तहत अनेक्सप्लेन्ड इनकम पर प्रभावी कर की दर को पहले के 78% (60% बेस + सरचार्ज + सेस) से घटाकर अब 39% (30% बेस रेट के साथ) कर दिया गया है। यह संशोधन उन करदाताओं के लिए एक बड़ी राहत है जो अपनी आय को स्पष्ट करने में तकनीकी कठिनाइयों का सामना करते हैं। साथ ही, टीडीएस (TDS) और टीसीएस (TCS) के प्रावधानों को पहले से अधिक लचीला बनाकर कागजी कार्रवाई के बोझ को कम किया गया है।

जीएसटी के मोर्चे पर बोलते हुए सीए निखिल गुप्ता ने बताया कि बजट 2026 में रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है, जो विशेष रूप से छोटे और मझोले (MSME) व्यापारियों के लिए संजीवनी साबित होगा। इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नियमों में स्पष्टता आने से अब कानूनी विवादों में कमी आएगी। इसके अतिरिक्त, रिफंड प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और तेज किया गया है, जिससे एक्सपोर्टर्स की वर्किंग कैपिटल नहीं फंसेगी। ई-इनवॉयसिंग प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाकर फर्जी बिलिंग जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी लगाम कसी जाएगी।

बजट 2026 की एक प्रमुख विशेषता दंड के प्रावधानों में बरती गई नरमी है। सरकार ने कई छोटे कर अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव दिया है। अब करदाताओं पर भारी जुर्माना लगाने के बजाय ‘विश्वास-आधारित’ प्रशासन पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य करदाताओं के मन से डर को खत्म कर उन्हें स्वैच्छिक कर भुगतान के लिए प्रोत्साहित करना है। सेमिनार में यह भी बताया गया कि आयकर रिर्टन को संशोधित करने की अवधि को भी विस्तारित किया गया है, ताकि मानवीय त्रुटियों को बिना किसी कानूनी झंझट के सुधारा जा सके।

बजट 2026 की ये नई घोषणाएं भारत के व्यापार और अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम हैं। जानकारों का कहना है कि अब नियमों के आसान होने से कानूनी झगड़े कम होंगे और सरकार व जनता के बीच भरोसा बढ़ेगा। आगरा में हुई इस मीटिंग से यह साफ हो गया है कि भविष्य में टैक्स का सारा काम कंप्यूटर और तकनीक की मदद से होगा। इससे न केवल टैक्स चोरी रुकेगी, बल्कि हमारे देश के व्यापारियों को दुनिया भर में अपना काम बढ़ाने और मुकाबला करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

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