ब्रह्मा या बिग बैंग? | अद्वैत वेदांत दर्शन की विद्वान डॉ. (प्रोफेसर) वंदना दिया शर्मा का महाशिवरात्रि पर खुलासा | महाशिवरात्रि विशेष |

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (15/02/2026): आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर संपूर्ण भारतवर्ष शिवमय हो उठा। देशभर में भक्तों और श्रद्धालुओं ने अपने-अपने भाव और परंपराओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास किया। कहीं बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध और जल अर्पित किया गया, तो कहीं रात्रि जागरण, मंत्र-जाप और ध्यान के माध्यम से शिव आराधना की गई।

इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठता है—क्या भगवान शिव केवल बेलपत्र, भांग, धतूरा और जल चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं, या फिर उन्हें प्रसन्न करने का कोई और गूढ़ आध्यात्मिक मार्ग भी है? आधुनिक जीवनशैली में हम भगवान शिव की उपासना किस प्रकार कर रहे हैं, और वास्तव में शिव तत्व क्या है? उनकी पूजा-पद्धति का दार्शनिक आधार क्या है?‌ इन्हीं प्रश्नों पर मंथन करने के लिए टेन न्यूज लाइव ने महाशिवरात्रि के अवसर पर – AI एवं इंटरनेट के युग में महाशिवरात्रि का महत्व एवं पूजा विषय पर एक विशेष मुलाक़ात का आयोजन किया।

इस विशेष कार्यक्रम में टेन न्यूज नेटवर्क के संस्थापक एवं भारत सरकार के पूर्व अनुसंधान अधिकारी गजानन माली ने अद्वैत वेदांत की प्रख्यात विद्वान डॉ. वंदना शर्मा ‘दिया’ के साथ विस्तृत साक्षात्कार किया।

संवाद के दौरान डॉ. वंदना शर्मा ने महाशिवरात्रि की आध्यात्मिक महत्ता, शिव से जुड़ी पौराणिक कथाओं की वैज्ञानिक व्याख्या, आज के युवाओं की डिजिटल जीवनशैली में आध्यात्मिकता की भूमिका तथा वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर अपने विचार साझा किए। यह विशेष संवाद महाशिवरात्रि के अवसर पर आस्था, दर्शन और समकालीन जीवन के बीच एक सार्थक सेतु के रूप में सामने आया।

विज्ञान और आध्यात्म में संगम

गजानन माली ने सबसे पहले पूछा कि इंटरनेट और AI के इस युग में महाशिवरात्रि का क्या महत्व है और सृष्टि की रचना को आध्यात्मिक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कैसे समझा जा सकता है। प्रोफेसर डॉ. वंदना दिया शर्मा ने बताया कि ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना और बिग बैंग थ्योरी दोनों मूलतः एक ही सत्य के दो दृष्टिकोण हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “जैसे जल को अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है—हिंदी में ‘जल’, अंग्रेजी में ‘Water’ और उर्दू में ‘आब’—वैसे ही सृष्टि के प्रारंभ को भारत में ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य से और पश्चिम में बिग बैंग के विस्फोट से जोड़ा गया है।”

डॉ. वंदना ने आगे कहा कि पश्चिम की जटिल थ्योरीज़ को केवल वैज्ञानिक ही समझ सकते हैं, लेकिन हमारे पुराणों ने इन्हें कथाओं के माध्यम से सरल बना दिया है, जिससे आम व्यक्ति भी गूढ़ रहस्यों को समझ सकता है। “दोनों में कोई भेद नहीं है, बस अलग-अलग नाम और दृष्टिकोण हैं,” उन्होंने स्पष्ट किया।

युवा पीढ़ी और पौराणिक कथाएँ

साक्षात्कार में चर्चा का एक अहम हिस्सा युवाओं के सवालों पर केंद्रित रहा। गजानन माली ने समुद्र मंथन जैसी पौराणिक घटनाओं पर सवाल उठाने वाले युवाओं के दृष्टिकोण के बारे में पूछा। प्रोफेसर डॉ. वंदना ने कहा कि यह शिक्षा प्रणाली के पश्चिमी प्रभाव का परिणाम है। उन्होंने कहा, “हमारा हृदय ही समुद्र है। इसमें देव और दानव दोनों हैं। जब हम शिव की शरण में जाते हैं और ‘मंथन’ करते हैं, तो पहले विष निकलता है—जो हमारे भीतर के नकारात्मक विचारों का प्रतीक है। इस प्रक्रिया से सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। इसे समझने के लिए शिक्षकों और प्रोफेसरों का मार्गदर्शन आवश्यक है।”
उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेजों में इस तरह की आध्यात्मिक शिक्षाओं पर चर्चा नहीं होती। इस कमी को भरने के लिए योग्य शिक्षक ही युवाओं को इन रहस्यों की गहराई से समझा सकते हैं।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

महाशिवरात्रि के पर्व पर पूजा-अर्चना और साधना के महत्व पर डॉ. वंदना ने कहा कि शिव सौम्य हैं और उनका ध्यान और भक्ति कर्मकांड से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि चार प्रहरों में विधिपूर्वक अभिषेक करने से इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। “पूजा का वास्तविक प्रभाव तभी होता है जब आप उपस्थित होकर श्रद्धा और भक्ति से इसे संपन्न करते हैं। डिजिटल माध्यम से पूजा का कोई वास्तविक प्रभाव नहीं होता,” उन्होंने स्पष्ट किया।

डॉ. वंदना ने यह भी कहा कि युवाओं की नई साधना—चाहे वह क्लबिंग हो, भजन संध्या हो या सामूहिक ध्यान—पुरानी परंपराओं का आधुनिक रूप है। उन्होंने इसे सकारात्मक परिवर्तन बताया और कहा कि यह युवाओं में नई ऊर्जा और सात्विकता लाता है।

तकनीक और आध्यात्म का संतुलन

AI और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा, “यदि हमारी जड़ें आध्यात्मिक हैं, तो AI और तकनीक जीवन में विनाश का कारण नहीं बनते। जहां आध्यात्मिकता है, वहां मनुष्य कभी रास्ता नहीं भटकता। ध्यान और साधना का उद्देश्य व्यक्तिगत हो सकता है—स्वास्थ्य, ज्ञान, धन या शिव भक्ति—लेकिन सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा है। शिव निराकार और साकार दोनों हैं। जैसे बिजली निराकार है लेकिन बल्ब या एसी में साकार होती है, वैसे ही शिव पूरे ब्रह्मांड में हैं। किसी एक रूप में उन्हें पूरी तरह नहीं परिभाषित किया जा सकता।”

ज्योतिर्लिंग और पूजा का प्रभाव

साक्षात्कार में ज्योतिर्लिंग की पूजा के महत्व पर भी चर्चा हुई। प्रोफेसर डॉ. वंदना ने बताया कि ज्योतिर्लिंग स्वयं प्रकट हुए हैं और उनकी ऊर्जा और आभा स्वाभाविक रूप से प्रभावशाली है। उन्होंने कहा, “घर की पूजा और ज्योतिर्लिंग की पूजा की तुलना करना उचित नहीं है। मंदिरों की प्रभावशीलता प्राण-प्रतिष्ठा और वास्तु के अनुसार निर्भर करती है। कई घरों में बनाए गए मंदिरों में यह प्रभाव नहीं होता।”

वैश्विक प्रभाव और संस्थाओं की भूमिका

डॉ. वंदना ने वैश्विक स्तर पर शैव दर्शन और वेदांत की लोकप्रियता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जर्मनी, कोरिया और अन्य देशों में लोग महाशिवरात्रि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मानते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस्कॉन और ब्रह्माकुमारी जैसी संस्थाएँ वास्तविक वेदांत और शिव भक्ति का प्रचार नहीं करतीं और अनुयायियों को भ्रमित कर सकती हैं।

आगे डाॅ दीया कहा कि “सच्चा मार्ग सेवा और भक्ति के माध्यम से प्राप्त होता है। चाहे आप घर में हों, झोपड़ी में हों या महल में, सेवा और प्रेम के माध्यम से ही ईश्वर तक पहुँचा जा सकता है। गजानन माली और प्रोफेसर डॉ. वंदना दिया शर्मा का यह साक्षात्कार न केवल महाशिवरात्रि और उसकी आध्यात्मिक गहराई को उजागर करता है, बल्कि विज्ञान, आधुनि युग और वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति के महत्व का भी संदेश देता है। डॉ. वंदना का कहना है कि सनातन धर्म हमेशा रहा है, है और रहेगा; विभिन्न रूपों और संस्कृतियों में यह अपनी छाप छोड़ता रहेगा और भविष्य में भी लोगों को मार्गदर्शन देता रहेगा।



प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति ,   दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।

टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.


Discover more from टेन न्यूज हिंदी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

टिप्पणियाँ बंद हैं।