ब्लॉकचेन आधारित भूमि रजिस्ट्री की मांग: राघव चड्ढा ने बताया रोडमैप

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (13/02/2026): राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने देश में भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड को पूरी तरह ब्लॉकचेन तकनीक पर लाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि भारत में एक “ब्लॉकचेन आधारित भूमि रजिस्ट्री लेजर” बनाया जाना चाहिए, जिसमें हर संपत्ति से जुड़ा रिकॉर्ड डिजिटल और सुरक्षित तरीके से दर्ज हो। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पहल की शुरुआत पहले 10 प्रमुख राज्यों और महानगरों, जिनमें टियर-2 शहर भी शामिल हों, से की जानी चाहिए।

राघव चड्ढा के अनुसार प्रस्तावित डिजिटल रिकॉर्ड बुक में हर बिक्री (सेल), दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और उत्तराधिकार (इनहेरिटेंस) का विवरण दर्ज किया जाएगा। यह रिकॉर्ड पूरी तरह टाइम-स्टैम्प्ड, छेड़छाड़ मुक्त (टेंपर प्रूफ) और 100 प्रतिशत पारदर्शी होगा। इससे रियल-टाइम प्रॉपर्टी ट्रैकिंग संभव हो सकेगी और स्वामित्व को लेकर स्पष्टता आएगी।

उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को अव्यवस्थित बताते हुए कहा कि, वर्तमान रियल एस्टेट बाजार में लोगों को रजिस्ट्रार कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं और दलालों का वर्चस्व बना रहता है। सर्कल रेट का गलत फायदा उठाकर नकद में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की जाती है, संपत्ति कर की चोरी होती है और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे व विवाद खड़े किए जाते हैं।

राघव चड्ढा ने भूमि विवादों से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे। उनके अनुसार देश में 66 प्रतिशत दीवानी विवाद भूमि से जुड़े होते हैं। करीब 45 प्रतिशत संपत्तियों के पास स्पष्ट स्वामित्व प्रमाण (टाइटल) नहीं है। संपत्ति पंजीकरण दक्षता के मामले में भारत 190 देशों में 133वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि 48 प्रतिशत संपत्तियां विवाद के घेरे में हैं और एक दीवानी अदालत को ऐसे मामलों के निपटारे में औसतन सात साल लग जाते हैं। साथ ही 6.2 करोड़ संपत्ति दस्तावेज अभी भी डिजिटलीकरण के लिए लंबित हैं।

उन्होंने दावा किया कि, “नेशनल ब्लॉकचेन रजिस्ट्री” इन समस्याओं का समाधान हो सकती है। उनके मुताबिक इससे मध्य वर्ग की संपत्ति सुरक्षित होगी, विवादों में कमी आएगी और टैक्स अनुपालन बढ़ेगा।

राघव चड्ढा ने अन्य देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि, स्वीडन में संपत्ति लेनदेन एक दिन में पूरा हो जाता है और विवाद दर मात्र 2 प्रतिशत है। जॉर्जिया में लेनदेन तीन दिन में पूरा होता है और विवाद दर 1 प्रतिशत है। वहीं यूएई में मात्र 10 मिनट में संपत्ति खरीदी-बेची जा सकती है और विवाद दर 1 प्रतिशत से भी कम है।

इसके विपरीत उन्होंने कहा कि, भारत में संपत्ति बेचने की प्रक्रिया में 2 से 6 महीने तक लग जाते हैं और विवाद की दर 48 प्रतिशत है।

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