कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज़ में फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला आयोजित

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (08/02/2026): कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज़ में शनिवार को एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 7 फरवरी 2026 को आयोजित हुई, जिसमें शिक्षकों को सिमुलेशन आधारित शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराने पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यशाला का संचालन ebek me से आईं विशेषज्ञ प्रशिक्षक एकता मलिक ने किया। सत्र का विषय “From Scenario to Debrief: Simulation TOT for Faculty” रखा गया था।

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र, ओरिएंटेशन और प्री-टेस्ट के साथ हुई। इस दौरान प्रतिभागियों को सिमुलेशन आधारित शिक्षा के उद्देश्य, उसकी उपयोगिता और कार्यशाला के अंत तक अपेक्षित दक्षताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण सत्रों में सिमुलेशन आधारित शिक्षण के मूल सिद्धांतों, सिमुलेशन, OSCE और डेमो के बीच अंतर, विभिन्न फिडेलिटी लेवल, लर्निंग थ्योरी, सिलेबस को सिमुलेशन ऑब्जेक्टिव में परिवर्तित करने की प्रक्रिया और प्रभावी परिदृश्य निर्माण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्वयं सिमुलेशन सीनारियो तैयार किए और सिमुलेशन डिजाइन से पहले आवश्यक चरणों को समझा।

कार्यशाला में साइकोलॉजिकल सेफ्टी, फिक्शन कॉन्ट्रैक्ट और फैसिलिटेटर की भूमिका से जुड़े दिशा-निर्देशों पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। फैकल्टी सदस्यों को एक पूर्ण सिमुलेशन का लाइव डेमो दिखाया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इस दौरान लर्नर्स को प्रभावी ढंग से मैनेज करने, समय प्रबंधन और संभावित त्रुटियों से निपटने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी गई।

इसके अतिरिक्त Plus-Delta और Advocacy-Inquiry जैसी तकनीकों, रिफ्लेक्टिव प्रश्न पूछने की कला, सीमित संसाधनों में सिमुलेशन लागू करने की रणनीतियों, सामान्य गलतियों से बचाव और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का समापन पोस्ट-टेस्ट, प्रतिभागियों के फीडबैक, अनुभव साझा करने और वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। संस्थान के प्रबंध निदेशक संदीप गोयल ने कहा कि सिमुलेशन आधारित शिक्षा भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रभावी माध्यम है। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव मिलता है, निर्णय क्षमता विकसित होती है और रोगी सुरक्षा को मजबूती मिलती है।
शैक्षिक निदेशक बिंदिया गोयल ने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में व्यावहारिक प्रशिक्षण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिमुलेशन तकनीक से शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों का आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। उन्होंने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी प्रतिभागियों की सराहना की।


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