डीजल घोटाला: PWD में कागजों पर दौड़ते रहे कबाड़ वाहन, फिर क्या हुआ?

टेन न्यूज नेटवर्क

Uttar Pradesh News (02/02/2026): उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में कबाड़ हालत में खड़े वाहनों के नाम पर डीजल खर्च दिखाकर सरकारी धन की हेराफेरी का मामला सामने आया है। जांच में सामने आया है कि कई वाहन वर्षों से एक ही जगह खड़े हैं, चलने की स्थिति में नहीं हैं, इसके बावजूद कागजों में उन्हें हजारों किलोमीटर चलाया जा रहा है।

पहला मामला, 43 साल पुरानी जीप URE-3740 से जुड़ा है, जो लखनऊ स्थित PWD वर्कशॉप में खड़ी है। इस जीप के पहियों में जंग लग चुका है, सीटें उखड़ चुकी हैं, गियर बॉक्स, स्टेयरिंग और डैशबोर्ड टूटे हुए हैं। वाहन के भीतर टूटा सामान और कबाड़ पड़ा है। यह जीप कई वर्षों से एक ही जगह खड़ी है और विभाग द्वारा इसे कंडम घोषित किया जा चुका है।

26 अगस्त 2025 को चीफ इंजीनियर यूके सिंह ने इस जीप को कंडम घोषित करने का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद नवंबर 2025 में इस वाहन में 540 लीटर डीजल भरवाने का बिल बनाया गया, जिसकी राशि 49,816 रुपये बताई गई। बिल में दावा किया गया कि जीप नियमित रूप से चल रही है।

जांच के दौरान पार्किंग में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि यह जीप पिछले 2-3 वर्षों से वहीं खड़ी है और कभी बाहर नहीं गई। चौकीदार और ड्राइवरों ने भी वाहन चलाने से इनकार किया। जिन ड्राइवरों के नाम लिए गए, उन्होंने जीप चलाने की बात से साफ इनकार कर दिया।

इस वाहन के संचालन की जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर टेक्निकल (JET) अनिल वर्मा के पास थी। उन्होंने दावा किया कि दिसंबर 2025 तक गाड़ी चलाई गई, लेकिन कर्मचारियों और ड्राइवरों के बयानों से यह दावा गलत साबित हुआ।

लखनऊ के आरटीओ संजय तिवारी ने मामले पर कहा कि, वर्षों तक बिना रिन्यूवल वाहन का चलना गंभीर सवाल है और मामले में नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाएगी।

दूसरा मामला, एंबेसडर कार UP32-BG-5326 से जुड़ा है। यह वाहन भी महीनों से कबाड़ हालत में खड़ा है, लेकिन इसे अब तक कंडम घोषित नहीं किया गया। नवंबर 2025 में इस कार के नाम पर 60,767 रुपये का डीजल बिल लगाया गया, जिस पर अधिशासी अभियंता रंजीता प्रसाद के हस्ताक्षर हैं।

JET अनिल वर्मा के अनुसार, यह गाड़ी दिसंबर 2025 से पार्किंग में खड़ी है और अक्टूबर 2025 तक इसका उपयोग किया गया था। हालांकि, एक्सईएन फिरदौस रहमानी और ड्राइवर सौरभ यादव दोनों ने कई महीनों से वाहन न चलाने की बात कही।

कोहली पेट्रोल पंप के मैनेजर अभिषेक मिश्रा ने बताया कि PWD के जूनियर इंजीनियर की पर्ची पर डीजल डाला जाता था और वाहन नंबर की जांच नहीं की जाती थी।

जांच में सामने आया है कि, कई कंडम और खराब वाहनों के नाम पर हर महीने हजारों रुपये का डीजल खर्च दिखाया गया। जीप URE-3740 और एंबेसडर कार UP32-BG-5326 के मामलों में JET अनिल वर्मा और अधिशासी अभियंता रंजीता प्रसाद की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

चीफ इंजीनियर यूके सिंह ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।


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