नई दिल्ली (17 जनवरी, 2025): दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच पूर्वांचल समाज को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों पार्टियां खुद को पूर्वांचल समाज का असली हितैषी साबित करने की कोशिश कर रही हैं। इस मुद्दे पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप से सियासी पारा चढ़ गया है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने 12 पूर्वांचलियों को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी ने केवल 5 को। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने न सिर्फ पूर्वांचल समाज के लिए कोई काम नहीं किया, बल्कि उन्हें अपमानित भी किया। उन्होंने बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने आम आदमी पार्टी के विधायक ऋतुराज झा को राष्ट्रीय टीवी पर गाली दी।
केजरीवाल का बयान:
केजरीवाल ने कहा, “आम आदमी पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो पूर्वांचल समाज का सम्मान करती है। हमने 12 पूर्वांचलियों को टिकट दिया है। बीजेपी ने न तो उनके लिए कोई काम किया और न ही उन्हें सम्मान दिया।”
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी बीजेपी पर हमला बोला और कहा कि 5 पूर्वांचलियों को टिकट देकर बीजेपी ने इस समाज का अपमान किया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी केवल चुनाव के समय ही पूर्वांचलियों को याद करती है, जबकि आम आदमी पार्टी ने हमेशा उनके हितों की रक्षा की है।”
बीजेपी का पलटवार:
दूसरी ओर, बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के इन आरोपों को खारिज करते हुए उसे घड़ियाली आंसू बहाने वाली पार्टी करार दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “कोविड महामारी के दौरान आप सरकार ने आनंद विहार से हजारों पूर्वांचलियों को पैदल घर भेजा। अब वह उनके चैंपियन बनने का ढोंग कर रही है।”
जेपी नड्डा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने केवल चुनावी फायदे के लिए यह मुद्दा उठाया है। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली सरकार ने पिछले 10 सालों में पूर्वांचल समाज के लिए क्या किया।
चुनाव में सियासी पारा गरम:
पूर्वांचल समाज को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच चल रही इस बयानबाजी ने चुनावी माहौल को गर्मा दिया है। जहां आम आदमी पार्टी खुद को पूर्वांचलियों का रक्षक बता रही है, वहीं बीजेपी इसे महज चुनावी रणनीति करार दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में पूर्वांचल समाज का वोट चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में दोनों पार्टियां इस वर्ग को अपने पाले में करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पूर्वांचल समाज के वोट किसके पक्ष में जाते हैं और दिल्ली की सत्ता का फैसला किसके हक में होता है।।
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