Delhi Politics: क्या आम आदमी पार्टी से दूरी बना रहे हैं राघव चड्ढा?

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (21 जनवरी 2026): बीते कुछ दिनों से दिल्ली की सियासत में एक सवाल लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, क्या राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले हैं? इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया और अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या राघव चड्ढा किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं या फिर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

इन अटकलों की सबसे बड़ी वजह बीते कुछ समय से आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में राघव चड्ढा की लगातार गैरमौजूदगी मानी जा रही है। पहले जहां वह पार्टी के लगभग हर बड़े कार्यक्रम में सक्रिय रूप से नजर आते थे, वहीं अब उनकी मौजूदगी काफी कम दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी के कई नेता सड़कों पर उतरे, लेकिन राघव चड्ढा वहां नजर नहीं आए। इसी तरह संजय सिंह की बेटी इशिता सिंह की फिल्म के टीजर लॉन्च के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, मगर राघव चड्ढा की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े कर दिए।

इतना ही नहीं, इन दिनों संजय सिंह उत्तर प्रदेश में पदयात्रा कर रहे हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं, लेकिन राघव चड्ढा वहां भी नजर नहीं आए। पंजाब में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। राज्य में हो रहे सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में जहां अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया लगातार सक्रिय दिख रहे हैं, वहीं राघव चड्ढा की मौजूदगी लगभग नहीं के बराबर है। गुजरात दौरे के दौरान भी जब पार्टी के कई नेता अरविंद केजरीवाल के साथ दिखे, तब राघव चड्ढा वहां नजर नहीं आए।

राघव चड्ढा को 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के अहम फैक्टर के तौर पर देखा गया था। उस समय कहा गया था कि पंजाब में पार्टी की जीत में उनकी बड़ी भूमिका रही है। दिल्ली में भी विधायक रहने के दौरान और बाद में राज्यसभा सांसद बनने के बाद वह पार्टी के सबसे सक्रिय और लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते थे। उनकी स्वीकार्यता केवल पार्टी तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक स्तर पर उनकी एक अलग पहचान बनी।

हाल ही में गिग वर्कर्स से जुड़े मुद्दे को लेकर चलाए गए अभियान से राघव चड्ढा को देशभर में नई पहचान मिली। इस अभियान के बाद उनकी लोकप्रियता खासतौर पर वर्किंग क्लास के बीच तेजी से बढ़ी। हालांकि इस पूरे अभियान और इसकी कामयाबी के दौरान उन्होंने न तो आम आदमी पार्टी और न ही अरविंद केजरीवाल का सार्वजनिक रूप से जिक्र किया। आमतौर पर राजनीति में देखा जाता है कि किसी बड़े मुद्दे पर सफलता मिलने पर उसका श्रेय पार्टी नेतृत्व को दिया जाता है, लेकिन इस मामले में राघव चड्ढा का रुख अलग नजर आया।

मनीष सिसोदिया के जन्मदिन और नववर्ष के मौके पर दिल्ली में आयोजित पार्टी में भी राघव चड्ढा नजर नहीं आए थे, जिससे यह सवाल उठने लगा कि उनके और पार्टी के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। उनकी लगातार गैरमौजूदगी और सीमित सार्वजनिक गतिविधियों ने अटकलों को और हवा दे दी है।

कुल मिलाकर सवाल यही है कि क्या आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है या फिर वह राजनीति में कोई नई राह चुनने की तैयारी में हैं। अगर राघव चड्ढा पार्टी में बने रहते हैं तो उनकी बढ़ती लोकप्रियता का लाभ आम आदमी पार्टी को मिल सकता है, लेकिन अगर वह किसी दूसरे दल में शामिल होते हैं या किसी नए विकल्प की ओर बढ़ते हैं, तो इसका सीधा फायदा किसे मिलेगा यह आने वाला समय ही बताएगा।।


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