उद्घाटन से ठीक पहले जेवर एयरपोर्ट को लेकर युवाओं का क्यों फूटा गुस्सा
टेन न्यूज नेटवर्क
Jewar News (21/01/2026): नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन से पहले प्रभावित किसानों और ग्रामीण युवाओं में भारी आक्रोश है। आरोप है कि विस्थापित परिवारों के वयस्क सदस्यों को नौकरी या 5 लाख रुपये मुआवज़े का वादा किया गया था, लेकिन सात साल बाद भी न स्थायी रोजगार मिला और न ही मुआवज़ा। युवाओं का कहना है कि ट्रेनिंग और सुरक्षित भविष्य के दावे खोखले साबित हुए हैं, क्योंकि उन्हें केवल निजी ठेका कंपनियों में अस्थायी और असुरक्षित नौकरियां दी जा रही हैं। रोजगार मेलों में भी साफ कर दिया गया कि नौकरी स्थायी नहीं होगी, जिससे भविष्य और मुआवज़े को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी मांग को लेकर ग्रामीण जेवर एयरपोर्ट के प्रवेश स्थान पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
टेन न्यूज से बातचीत में देवेश कुमार (गांव–शोरसी) ने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए उनकी और उनके गांव की जमीन गई, एयरपोर्ट उड़ान के लिए तैयार है लेकिन 7 साल बीत जाने के बाद भी स्थानीय युवाओं को आज तक नौकरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि शासन–प्रशासन के चक्कर काटते-काटते युवा थक चुके हैं और अब मजबूरी में सड़क पर बैठकर अपनी बात रख रहे हैं।
देवेश कुमार ने कहा कि जमीन देते वक्त सरकार की तरफ से नौकरी का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज हालात यह हैं कि पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार हैं। खेती-बाड़ी छिन गई, आजीविका का कोई साधन नहीं बचा और छोटे-छोटे बच्चों का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
देविंदर शर्मा ने बताया कि प्रशासन की तरफ से बार-बार मीटिंग के लिए बुलाया जाता है, लेकिन हर बार वही पुराने मेल और वही कागजी प्रक्रिया दोहराई जाती है। उनका कहना है कि नौकरी देने की मंशा ही नहीं दिख रही। 7 साल का समय अपने आप में बहुत लंबा होता है और इसके लिए शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि सभी जिम्मेदार हैं।

अन्य सदस्य ने बताया कि अधिकारियों ने पहले चरण में उनकी मांगें गलत तरीके से लिख दीं, जिसकी वजह से आज तक संशोधन नहीं हो पाया। जब अधिकारी ही गलत ड्राफ्ट बनाकर चले जाएं, तो नुकसान युवाओं को ही उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि अगर सच में नौकरी देनी होती, तो अब तक सभी को नियुक्ति मिल चुकी होती।
मौजूद युवाओं ने बताया कि 2 तारीख को एसडीएम की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि ड्राफ्ट में बदलाव कर उसे प्रकाशित किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एसडीएम मौके पर आकर साफ-साफ बताएं कि नौकरी सरकारी माध्यम से मिलेगी या प्राइवेट के जरिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
अन्य सदस्य ने कहा कि सड़क पर बैठने के बावजूद उन्होंने दोनों तरफ रास्ता खुला रखा है ताकि किसी को परेशानी न हो, लेकिन फिर भी प्रशासन उन्हें जबरन हटाने की कोशिश कर रहा है। युवाओं का कहना है कि वे किसी को परेशान नहीं कर रहे, सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि जमीन के बदले उन्हें सिर्फ मुआवजा मिला, लेकिन रोजगार खत्म हो गया। कई युवा बीटेक और अन्य डिग्रियां लिए हुए हैं, फिर भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशिक्षण या लैब बनाकर रोजगार दिया जाए तो वे काम करने को तैयार हैं।

युवाओं और महिलाओं ने साफ कहा कि जब तक सरकार और प्रशासन उनकी बात सुनकर ठोस समाधान नहीं देता, तब तक वे अनशन पर बैठे रहेंगे। उनका कहना है कि जमीन विकास के लिए दी, लेकिन आज वही विकास उनके परिवारों के लिए संकट बन गया है।
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