New Delhi News (20 January 2026): राजधानी दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में दफ्तर जाने वालों की भीड़, बाजारों की चहल-पहल और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण सड़कों पर अक्सर रफ्तार थम जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार के निर्देश पर एक नई और व्यावहारिक पहल शुरू की गई है, जिसके तहत 600 डीटीसी बस चालकों को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ तैनात किया गया है।
विशेष प्रशिक्षण के बाद मिली जिम्मेदारी
इन डीटीसी बस चालकों को तैनाती से पहले टोडापुर स्थित ट्रैफिक पुलिस मुख्यालय में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें ट्रैफिक नियमों की विस्तृत जानकारी, सिग्नल मैनेजमेंट, जाम खुलवाने की तकनीक, सड़क पर त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया और ट्रैफिक पुलिस के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करने के तरीके सिखाए गए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ये चालक मौके पर प्रभावी भूमिका निभा सकें।
नियम तोड़ने वालों पर भी रहेगी नजर
प्रशिक्षण के दौरान डीटीसी चालकों को यह भी बताया गया कि वे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, बिना कागजात चल रही गाड़ियों और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कैसे करें। ऐसे मामलों में वे सीधे ट्रैफिक पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई में सहयोग कर सकते हैं, जिससे कानून व्यवस्था और यातायात अनुशासन दोनों को मजबूती मिल रही है।
हर रेंज में 100 ड्राइवर, 15 जिलों को कवर
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) दिनेश कुमार गुप्ता के अनुसार, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की छह रेंज मध्य, पश्चिमी, उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी और नई दिल्ली राजधानी के कुल 15 ट्रैफिक जिलों को कवर करती हैं। इन्हीं रेंजों में लगभग 600 डीटीसी बस चालकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक रेंज को करीब 100 चालक दिए गए हैं, ताकि जाम प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त मैनपावर उपलब्ध हो सके।
रोजाना जाम वाले इलाकों पर खास फोकस
ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही उन स्थानों की पहचान कर ली है, जहां रोजाना जाम लगता है। इनमें व्यस्त चौराहे, फ्लाईओवर के नीचे के हिस्से, बड़े बाजार, मेट्रो स्टेशनों के आसपास की सड़कें और पीक ऑवर्स वाले प्रमुख रूट शामिल हैं। इन्हीं जगहों पर डीटीसी चालकों को तैनात किया गया है, जहां वे ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर यातायात को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अनुभव का सही उपयोग, असर भी दिखने लगा
इस पहल के पीछे यह भी कारण है कि इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े के विस्तार के बाद कुछ पारंपरिक डीटीसी बस चालकों की नियमित ड्यूटी कम हो गई थी। सरकार ने इन्हीं अनुभवी चालकों को ट्रैफिक व्यवस्था से जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया है। ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जहां-जहां डीटीसी ड्राइवर तैनात किए गए हैं, वहां पीक ऑवर्स में जाम संभालना, ट्रैफिक डायवर्जन करना और गलत पार्किंग हटवाना पहले से आसान हुआ है। इससे न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आई है, बल्कि प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।।
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