इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को न मिलाएं: भविष्य सुरक्षित करने का क्या है सही प्लानिंग

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (18/01/2026): भारत में अक्सर लोग इंश्योरेंस को निवेश के साथ जोड़कर देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का साफ मानना है कि यह सबसे बड़ी गलती है। इंश्योरेंस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि निवेश का लक्ष्य आपके पैसे को बढ़ाना होता है। जब दोनों को मिलाया जाता है, तो महंगाई धीरे-धीरे निवेश की वैल्यू को कम कर देती है और अंतिम रिटर्न बहुत कमजोर हो जाता है। इसलिए, मनी-बैक या एंडोमेंट जैसी पॉलिसियों से बचने की सलाह दी जाती है और सुरक्षा व निवेश को अलग-अलग रखना ही समझदारी है।

स्वास्थ्य के बढ़ते खर्चों को देखते हुए हेल्थ इंश्योरेंस आज हर परिवार की प्रमुख जरूरत बन चुका है। अचानक आने वाला मेडिकल बिल किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार को आर्थिक संकट में डाल सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसी पॉलिसी लें जिसमें ‘नो रूम रेंट कैपिंग’ हो, ताकि अस्पताल में भर्ती होने पर कमरे के किराए की सीमा आपको परेशान न करे। इसके अलावा ‘को-पे’ वाले विकल्प युवा उम्र में नहीं लेने चाहिए, क्योंकि इनमें इलाज का कुछ हिस्सा खुद चुकाना पड़ता है। पुरानी बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड भी कम होना चाहिए, ताकि ज़रूरत पड़ने पर दावा करने में दिक्कत न आए।

इंश्योरेंस की बात हो और टर्म प्लान का ज़िक्र न हो, यह संभव नहीं। टर्म इंश्योरेंस परिवार की आर्थिक सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है। कम उम्र यानी करीब 25 साल के आसपास इसे लेने पर प्रीमियम बेहद कम होता है, जबकि कवरेज काफी बड़ा मिलता है। साथ ही, एक्सीडेंटल डिसेबिलिटी राइडर जोड़ने से दुर्घटना में स्थायी अपाहिज होने की स्थिति में भी आर्थिक सहायता सुनिश्चित होती है।

युवा निवेशकों को एक महत्वपूर्ण फॉर्मूला सुझाव के रूप में दिया जाता है: “Buy Term and Invest the Rest.” इसका अर्थ है कि महंगी मनी-बैक पॉलिसी लेने के बजाय सस्ता टर्म प्लान चुनें और बची हुई रकम को म्यूचुअल फंड SIP या अन्य निवेश विकल्पों में लगाएं। उदाहरण के तौर पर, सुरेश और रमेश की तुलना की गई—सुरेश ने मनी बैक पॉलिसी ली और 20 साल बाद मामूली रिटर्न पाया। वहीं, रमेश ने सस्ता टर्म प्लान लिया और शेष धनराशि को SIP में जमा किया, जिससे दो दशक बाद वह करोड़पति बन गया। यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि सही वित्तीय रणनीति भविष्य बदल सकती है।

इंश्योरेंस लेते समय कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। पॉलिसी फॉर्म भरते समय शराब, सिगरेट या किसी बीमारी से जुड़ी जानकारी छिपाने से क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सारी जानकारी सही देना आवश्यक है। इसके अलावा सभी पॉलिसियों की जानकारी एक डायरी में नोट कर परिवार को बताना चाहिए, ताकि किसी संकट के समय उन्हें सही दस्तावेज़ और पासवर्ड खोजने में परेशानी न हो।

इंश्योरेंस सुरक्षा का माध्यम है, न कि टैक्स बचाने या पैसों को बढ़ाने का तरीका। सही समय पर सही पॉलिसी चुनकर और सही जगह निवेश करके आप न सिर्फ अपने वर्तमान को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि भविष्य की मजबूत आर्थिक नींव भी बना सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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