New Delhi News (17 जनवरी, 2026): पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में खेती कर रहे किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि केंद्र सरकार ने भारत–पाकिस्तान सीमा (India–Pakistan Border) पर लगी सुरक्षा बाड़ (Border Fencing) को अंतरराष्ट्रीय सीमा के और करीब शिफ्ट करने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इस फैसले से हजारों एकड़ कृषि भूमि किसानों के लिए बिना किसी रोक-टोक के फिर से सुलभ हो सकेगी और वर्षों से चली आ रही परेशानियों का अंत होगा।
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में पंजाब की करीब 532 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई स्थानों पर फेंसिंग राज्य की जमीन के भीतर दो से तीन किलोमीटर अंदर तक लगी हुई है, जिसके कारण किसानों को रोज़ाना पहचान पत्र (Identity Card) दिखाकर और बीएसएफ (BSF Escort) की निगरानी में अपनी ही जमीन पर खेती करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थिति न केवल किसानों के लिए मानसिक तनाव का कारण है बल्कि खेती की उत्पादकता को भी प्रभावित करती है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के अनुसार, गृह मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) से कोई समझौता किए बिना फेंसिंग को अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप पुनः स्थापित करने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पठानकोट क्षेत्र में इस तरह का प्रयोग पहले ही किया जा चुका है और सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
सीमा मुद्दे के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष कई अन्य लंबित विषय भी उठाए। इनमें प्रस्तावित सीड्स बिल 2025 (Seeds Bill 2025) पर आपत्ति, सतलुज–यमुना लिंक (SYL Dispute) नहर का मामला, एफसीआई (FCI) द्वारा खाद्यान्न उठान की धीमी प्रक्रिया, आढ़तिया कमीशन (Arthia Commission) का वर्षों से फ्रीज रहना, ग्रामीण विकास फंड (RDF) और मंडी फंड का भुगतान न होना तथा चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब की भूमिका को कमजोर किए जाने जैसे मुद्दे शामिल रहे।
सीड्स बिल पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य के हितों की अनदेखी करता है और किसानों को बीज कंपनियों पर निर्भर बनाने की कोशिश करता है। वहीं एसवाईएल मुद्दे पर उन्होंने दोहराया कि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है और नहर का निर्माण राज्य के हितों के खिलाफ है।
खाद्यान्न भंडारण और उठान पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समय रहते एफसीआई द्वारा पर्याप्त मात्रा में गेहूं और चावल का मूवमेंट नहीं हुआ तो आगामी रबी विपणन सीजन (RMS 2026-27) में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने विशेष ट्रेनों की व्यवस्था कर जल्द से जल्द स्टॉक क्लीयर करने की मांग की।
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