New Delhi News (14 January 2026): दिल्ली सरकार ने गर्मी के मौसम में यमुना नदी के घटते जलस्तर और कमजोर प्रवाह को लेकर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। राजधानी में यमुना के 22 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच में पानी के फ्लो की रियल टाइम निगरानी के लिए दो अहम स्थानों पर मॉनिटरिंग स्टेशन बनाने की योजना बनाई गई है। पहला मॉनिटरिंग स्टेशन हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज के पास लगाया जाएगा, जबकि दूसरा स्टेशन दिल्ली में यमुना के अंतिम छोर पर स्थापित होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हरियाणा से छोड़ा गया पानी वास्तव में दिल्ली तक कितनी मात्रा में पहुंच रहा है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से यमुना के प्रवाह से जुड़ी सटीक जानकारी मिल सकेगी। इससे भविष्य में जल प्रबंधन से जुड़े फैसले अधिक प्रभावी ढंग से लिए जा सकेंगे।
दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, गर्मियों के दौरान यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने के लिए हथिनी कुंड बैराज से रोजाना करीब 2500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना चाहिए। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह मात्रा घटकर केवल 352 से 400 क्यूसेक तक सिमट गई है। इसका सीधा असर वजीराबाद बैराज से लेकर ओखला बैराज तक यमुना के पूरे प्रवाह पर पड़ता है। पानी की इतनी कम मात्रा के कारण नदी कई जगहों पर लगभग ठहरी हुई नजर आती है। इससे न सिर्फ यमुना का प्राकृतिक अस्तित्व खतरे में पड़ता है, बल्कि प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ता है। यही वजह है कि सरकार अब फ्लो मॉनिटरिंग को अनिवार्य कदम मान रही है।
जल बोर्ड की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि साल के 12 महीनों में से करीब 9 महीनों तक यमुना में जल प्रवाह बेहद कम रहता है। यह स्थिति न तो पर्यावरण के लिहाज से ठीक है और न ही दिल्ली की जल आपूर्ति के लिए सुरक्षित मानी जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते प्रवाह पर नियंत्रण और निगरानी नहीं की गई, तो राजधानी में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। खासतौर पर गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने पर हालात और बिगड़ सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यमुना के फ्लो को प्राथमिकता में रखा है। यह कदम भविष्य में दिल्ली की जल सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
सरकार इस पूरी मॉनिटरिंग व्यवस्था पर करीब 1.56 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। इसमें हाई-टेक उपकरणों पर लगभग 35.48 लाख रुपये, बोट के जरिए निगरानी व्यवस्था पर करीब 9.05 लाख रुपये और मैनपावर पर करीब 18.12 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिलने वाला डेटा जल बोर्ड और संबंधित विभागों को तुरंत उपलब्ध होगा। इससे यह साफ पता चल सकेगा कि हरियाणा से छोड़ा गया पानी तय मानकों के अनुसार है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी डेटा मिलने से राज्यों के बीच पानी को लेकर होने वाले विवादों में भी कमी आ सकती है।
इसके अलावा दिल्ली सरकार यमुना में गिरने वाले नालों और ट्रीटेड वॉटर की निगरानी के लिए 32 ऑनलाइन मॉनिटरिंग स्टेशन लगाने की भी योजना बना रही है। ये स्टेशन लगातार प्रदूषण और जल गुणवत्ता से जुड़ा डेटा डीपीसीसी के सर्वर को भेजेंगे। इससे यमुना और नालों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी। सरकार का मानना है कि फ्लो और प्रदूषण, दोनों की एक साथ निगरानी से यमुना को साफ और जीवंत बनाने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर यह कदम यमुना संरक्षण की दिशा में एक ठोस और तकनीकी पहल के रूप में देखा जा रहा है।।
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