दिल्ली समेत 7 एयरपोर्ट पर GPS स्पूफिंग की कोशिश, सरकार ने माना साइबर हमले के संकेत
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (13 January 2026): नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्यसभा में यह स्वीकार किया है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) के आसपास हाल के दिनों में जीपीएस स्पूफिंग की कोशिश सामने आई है। इस घटना के दौरान विमानों को नेविगेशन में असामान्य संकेत मिले, जिसके बाद पायलटों ने तुरंत वैकल्पिक नेविगेशन सिस्टम का सहारा लिया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्थिति पर समय रहते नियंत्रण कर लिया गया और किसी भी उड़ान की सुरक्षा से समझौता नहीं हुआ। सरकार के मुताबिक, यह घटना साइबर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर है और इसे संभावित हस्तक्षेप या साइबर हमले के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि नवंबर 2023 में DGCA द्वारा जीपीएस जामिंग और स्पूफिंग की रिपोर्टिंग अनिवार्य किए जाने के बाद से देश के कई बड़े हवाई अड्डों से ऐसी घटनाओं की सूचनाएं नियमित रूप से मिल रही हैं। दिल्ली के अलावा कोलकाता, अमृतसर, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई एयरपोर्ट के आसपास भी GNSS इंटरफेरेंस की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन मामलों में पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत वैकल्पिक प्रणालियों का इस्तेमाल किया। सरकार ने सदन में कहा कि सभी घटनाओं की विस्तृत जांच की जा रही है।
DGCA ने सुरक्षा को देखते हुए GNSS इंटरफेरेंस से निपटने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। 10 नवंबर 2025 से प्रभावी इस SOP के तहत पायलटों, ATC अधिकारियों और एयरलाइंस के लिए किसी भी असामान्य GPS गतिविधि की तुरंत और रियल-टाइम रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। DGCA का कहना है कि समय पर रिपोर्टिंग से पैटर्न की पहचान, स्रोत की जांच और त्वरित रोकथाम संभव होगी। इसके साथ ही एयरलाइंस को नियमित प्रशिक्षण और सिमुलेशन के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने एहतियात के तौर पर पारंपरिक ग्राउंड-आधारित नेविगेशन सिस्टम को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। Minimum Operating Network (MON) नामक यह व्यवस्था GPS बाधित होने या स्पूफिंग की स्थिति में भी विमानों को सुरक्षित मार्गदर्शन देने में सक्षम है। इसी कारण हालिया घटनाओं के बावजूद किसी भी उड़ान को रद्द नहीं करना पड़ा और न ही यात्रियों की सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। मंत्रालय ने कहा कि बहु-स्तरीय नेविगेशन सिस्टम भारत की विमानन सुरक्षा की बड़ी ताकत है।
जानकारों के मुताबिक, GPS स्पूफिंग एक गंभीर साइबर हमला है, जिसमें नकली सैटेलाइट सिग्नल भेजकर विमान या अन्य प्रणालियों को गलत लोकेशन, दिशा या गति की जानकारी दी जाती है। यह जामिंग से अलग है, क्योंकि इसमें सिग्नल बंद नहीं होते बल्कि सिस्टम को भ्रमित किया जाता है। आधुनिक विमानों में नेविगेशन, ऊंचाई नियंत्रण और लैंडिंग प्रक्रियाएं काफी हद तक GPS पर निर्भर होती हैं, इसलिए ऐसी घटनाओं को वैश्विक स्तर पर भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है। IATA समेत अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने पहले ही GPS स्पूफिंग के बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है।।
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