National News (13/01/2026): जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय सेना ने सीमा और इंटरनेशनल बॉर्डर के पास पाकिस्तान की तरफ से आते हुए कई ड्रोन देखे हैं। ये संदिग्ध ड्रोन राजौरी, नौशेरा, पुंछ और सांबा जैसे इलाकों में उड़ते हुए पाए गए। जैसे ही हमारी सेना को इन ड्रोन्स का पता चला, जवानों ने इन्हें गिराने और खदेड़ने के लिए अपनी बंदूकों और भारी मशीनगनों से फायरिंग शुरू कर दी।
ड्रोन दिखने के तुरंत बाद भारतीय सेना ने उन इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सेना यह पता लगा रही है कि क्या वापस भागने से पहले इन ड्रोन्स ने भारतीय जमीन पर हथियार, गोला-बारूद, नशीले पदार्थ या संदेश भेजने वाले उपकरण तो नहीं गिराए। यह हलचल भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद और बढ़ गई है, जिसके जवाब में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन्स का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है।
आतंकी संगठन अब हथियारों की सप्लाई के लिए ड्रोन्स का इस्तेमाल एक खास औजार की तरह कर रहे हैं। इनके जरिए वे सीमा पार से राइफलें और ग्रेनेड भेजकर आतंकियों की मदद करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा, इन ड्रोन्स का उपयोग नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए भी किया जाता है, ताकि उससे मिलने वाले पैसे से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके और स्थानीय युवाओं को नुकसान पहुँचाया जा सके।
हथियार गिराने के अलावा, ये ड्रोन आसमान से भारतीय सेना की पेट्रोलिंग के समय और रास्तों पर नजर रखते हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि हमारी रडार प्रणाली कहाँ कमजोर है, ताकि वहां से घुसपैठ की जा सके। साथ ही, बार-बार ड्रोन भेजकर सीमा के पास रहने वाले आम नागरिकों के मन में डर और घबराहट पैदा करने की भी कोशिश की जाती है।
यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने एक ऑडियो जारी कर बड़े आत्मघाती हमलों की धमकी दी है। यह धमकी लोगों में डर फैलाने की एक चाल मानी जा रही है। फिलहाल कश्मीर में “चिल्लई कलां” यानी कड़ाके की ठंड का 40 दिनों का समय चल रहा है, और भारतीय सेना ने इस मुश्किल मौसम में भी आतंकियों का सफाया करने के लिए अपने अभियान तेज कर दिए हैं।
भारतीय सेना ने अब अपनी सोच बदल ली है वे ड्रोन्स को सिर्फ जासूसी करने वाला खिलौना नहीं, बल्कि एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। इसी खतरे से निपटने के लिए सेना ने नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अब बॉर्डर पर ‘काउंटर-ड्रोन ग्रिड’ बनाए जा रहे हैं। इसमें ऐसे विशेष उपकरण लगाए गए हैं जो ड्रोन के सिग्नल को जाम कर देते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से रात के अंधेरे में भी ड्रोन्स को पहचान लेते हैं।
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