जहरीली यमुना: DPCC रिपोर्ट में 92 हजार पहुंचा फेकल कोलीफॉर्म

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (12 January 2026): दिल्ली की सत्ता परिवर्तन के बाद भी यमुना नदी की सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता बताने वाली भाजपा सरकार के दावों पर ताजा डीपीसीसी रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा नवंबर और दिसंबर 2025 की मासिक रिपोर्ट महीनों की देरी के बाद जनवरी 2026 में जारी की गई, जिसमें यमुना की स्थिति एक बार फिर भयावह बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर–अक्टूबर की बाढ़ के बाद नदी में जो अस्थायी सुधार दिखा था, वह नवंबर आते-आते खत्म हो गया। दिसंबर में यमुना के पानी में फिर से जहरीला सफेद झाग दिखाई देने लगा है, जो यह संकेत देता है कि दिल्ली की जीवनदायिनी नदी दोबारा गंभीर प्रदूषण की चपेट में है।

डीपीसीसी के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं, क्योंकि दिसंबर 2025 में यमुना में फेकल कोलीफॉर्म का स्तर बढ़कर 92,000 तक पहुंच गया, जबकि सुरक्षित मानक सीमा 2,500 मानी जाती है। यानी यह स्तर मानक से करीब 37 गुना अधिक है। इतना ही नहीं, नवंबर की रिपोर्ट में कई स्थानों पर घुलित ऑक्सीजन (DO) का स्तर शून्य दर्ज किया गया, जो जलीय जीवों के लिए बेहद घातक स्थिति है। विशेषज्ञों के अनुसार, DO का NIL होना इस बात का संकेत है कि उस हिस्से में मछलियों और अन्य जलीय जीवों का जीवित रहना लगभग असंभव हो जाता है।

रिपोर्ट की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट समय पर सार्वजनिक की गई थी, लेकिन नवंबर और दिसंबर की रिपोर्ट को दबाकर रखा गया। इन्हें जनवरी 2026 में एक साथ जारी किया गया, जिससे डीपीसीसी की कार्यप्रणाली पर संदेह गहराया है। अक्टूबर की रिपोर्ट में बाढ़ के बाद ‘क्लीन-अप इफेक्ट’ नजर आया था, लेकिन नवंबर-दिसंबर में वही प्रदूषण दोबारा खतरनाक स्तर पर लौट आया। आलोचकों का कहना है कि यदि रिपोर्ट समय पर जारी होती, तो हालात की गंभीरता पहले ही सामने आ सकती थी।

अलग-अलग निगरानी स्थलों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। अक्टूबर में जहां जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) का स्तर 2.5 दर्ज किया गया था, वहीं नवंबर में यह बढ़कर 3.0 हो गया। ISBT ब्रिज और असगरपुर जैसे अहम स्थानों पर नवंबर में DO का स्तर शून्य पाया गया। इसका सीधा अर्थ है कि इन इलाकों में यमुना का पानी पूरी तरह से मृत अवस्था में पहुंच चुका है। दिसंबर में फेकल कोलीफॉर्म के आंकड़े और बढ़ने से यह साफ हो गया कि बाढ़ के बाद मिला अस्थायी सुधार टिकाऊ नहीं था।

सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आता है। चुनावी दौर में भाजपा ने यमुना सफाई के लिए 1,816 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया था और 2028 तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता 1500 MGD तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन नवंबर 2025 की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के 37 में से 12 एसटीपी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। ओखला, वसंत कुंज और यमुना विहार जैसे प्रमुख एसटीपी में फेकल कोलीफॉर्म का स्तर तय सीमा से कई सौ गुना अधिक पाया गया, जो सीवेज प्रबंधन की विफलता को उजागर करता है।

कुल मिलाकर, यमुना की स्थिति एक बार फिर गंभीर संकट की ओर इशारा कर रही है। अक्टूबर में बाढ़ के पानी से साफ दिखने वाली नदी में नवंबर और दिसंबर में दोबारा जहरीला सफेद झाग नजर आना इस बात का प्रमाण है कि अनुपचारित सीवेज और फॉस्फेट का बहाव अब भी जारी है। रिपोर्ट में देरी, विफल एसटीपी और बढ़ते प्रदूषण के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि यमुना की सफाई अब फाइलों और भाषणों तक सिमटती जा रही है। अगर हालात नहीं बदले, तो 2026 का साल भी यमुना के लिए केवल ‘वादों का साल’ बनकर रह सकता है।


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