जांच एजेंसियों और न्यायालयों में कार्यपालिका के हस्तक्षेप के विरुद्ध AIBA की चेतावनी
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (09 January 2026): आल इंडिया बार एसोसिएशन (AIBA) ने पश्चिम बंगाल में हाल के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता और कड़ी निंदा व्यक्त की है, जहां सीएम ममता बनर्जी पर वैध छापेमारी की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने, कथित रूप से आधिकारिक दस्तावेज अपने साथ ले जाने, तथा बाद में ऐसी परिस्थितियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं, जिनके परिणामस्वरूप कलकत्ता उच्च न्यायालय को मामले की सुनवाई 14 तारीख तक स्थगित करनी पड़ी।
एक बयान में AIBA के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. आदीश सी. अग्रवाल ने कहा कि कानून का शासन भारत की संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही उच्च पद पर क्यों न हो, कानून से ऊपर या न्यायिक जांच से परे नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच और प्रवर्तन एजेंसियों का दायित्व है कि वे कानून के अनुसार कार्य करें, और उनके वैधानिक कर्तव्यों में किसी भी प्रकार का अवरोध या हस्तक्षेप संवैधानिक शासन की नींव पर सीधा प्रहार है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यह घटना संवैधानिक न्यायालयों की गरिमा, अधिकार और स्वतंत्र कार्यप्रणाली के दृष्टिकोण से भी अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा, “न्यायपालिका को बिना किसी दबाव या भय के स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाना चाहिए। ऐसी कोई भी स्थिति, जो किसी उच्च न्यायालय को परिस्थितियों के कारण कार्यवाही स्थगित करने के लिए बाध्य करे, संस्थागत सम्मान और संवैधानिक मर्यादा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।”
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की जिम्मेदारी कानून को कमजोर करने की नहीं, बल्कि उसे सुदृढ़ करने की होती है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास इस मूल सिद्धांत पर टिका है कि कानून अपना रास्ता स्वयं तय करता है, न कि राजनीतिक दबाव से।
संस्थागत संयम का आह्वान करते हुए, तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व उपाध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा, “हम सभी प्राधिकरणों से आग्रह करते हैं कि वे शक्तियों के पृथक्करण का सम्मान करें, चल रही जांचों में हस्तक्षेप से बचें और न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखें। राजनीतिक मतभेद कानूनी प्रक्रियाओं को शॉर्ट-सर्किट करने या संस्थानों पर दबाव डालने का औचित्य नहीं बन सकते।”
AIBA ने सक्षम प्राधिकरणों से अपील की कि वे कानून के अनुसार जवाबदेही सुनिश्चित करें तथा जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की महिमा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं। “लोकतंत्र शक्ति के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि संवैधानिक अनुशासन, संस्थागत सम्मान और कानून के शासन के प्रति निष्ठा से जीवित रहता है,” डॉ. अग्रवाल ने कहा।।
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