Lucknow News (04 January 2026): उत्तर प्रदेश सरकार फैमिली आईडी कार्ड के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। फैमिली आईडी को डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं से जोड़ने से जहां पात्र लाभार्थियों को समय पर लाभ मिल रहा है, वहीं फर्जी और दोहरे लाभार्थियों पर भी प्रभावी रोक लगाई जा रही है।
प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ा जा चुका है। इनमें 13 केंद्र सरकार और 85 राज्य सरकार की योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का सीधा लाभ प्रदेश के 15 करोड़ 7 लाख से अधिक नागरिकों को मिल रहा है। फैमिली आईडी पोर्टल पर अब तक करीब 44 लाख नागरिकों ने आवेदन किया है। शहरी क्षेत्रों में लेखपाल और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से फैमिली आईडी बनाई जा रही है।
फैमिली आईडी एक 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है, जिसमें पूरे परिवार का विवरण दर्ज रहता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “एक परिवार–एक पहचान” की परिकल्पना के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पात्रता के आधार पर योजनाओं का स्वतः चयन हो सके और गड़बड़ी या दोहराव से बचा जा सके।
फैमिली आईडी लागू होने से नागरिकों को आय, जाति, निवास जैसे प्रमाण पत्रों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। एक बार पंजीकरण होने के बाद, सभी आवश्यक जानकारियां इसी डेटाबेस से उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे समय, धन और श्रम की बचत हो रही है।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो परिवार किसी कारण से राशन कार्ड से वंचित हैं, वे भी फैमिली आईडी के जरिए सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें। इसके लिए विशेष पंजीकरण व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी पात्र परिवार लाभ से वंचित न रहे।
फैमिली आईडी बनवाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार नंबर और आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना अनिवार्य है। ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाता है। यदि मोबाइल नंबर बदल गया हो, तो उसे आधार से अपडेट कराना जरूरी है।
फैमिली आईडी के जरिए सरकार का लक्ष्य गरीब, श्रमिक, किसान, महिला, बुजुर्ग और दिव्यांग वर्ग तक योजनाओं का लाभ सीधे और समय पर पहुंचाना है। अब तक 19 लाख से अधिक भौतिक फैमिली आईडी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं और यह कार्ड पूरी तरह निःशुल्क है, जिस पर प्रति कार्ड लगभग 8 रुपये का खर्च सरकार वहन कर रही है।
फैमिली आईडी डेटाबेस में अब तक 15.7 करोड़ से अधिक नागरिक पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 14.7 करोड़ राशन कार्ड आधारित और 1.03 करोड़ स्व-पंजीकरण के माध्यम से जुड़े हैं। डाटाबेस का फील्ड सैचुरेशन 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। पांच-स्तरीय तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से फैमिली आईडी को योजनाओं से जोड़ा गया है, जिससे सरकारी सहायता पारदर्शी और सुगम तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंच रही है।।
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