कर्ज़ का जाल: बिज़नेस को ऊंचाइयों पर ले जाएगी या पूरी तरह मिटा देगी?

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (03/01/2026): बड़े बिज़नेस की दुनिया में कर्ज़ एक ऐसी तलवार है जो कंपनी को बना भी सकती है और मिटा भी सकती है। टाटा, रिलायंस और अडानी जैसी बड़ी कंपनियों पर लाखों करोड़ का कर्ज़ होने के बावजूद वे सुरक्षित हैं, क्योंकि उनकी कमाई उस कर्ज़ को चुकाने के लिए काफी है। लेकिन जब कोई कंपनी अपनी कमाई से ज़्यादा कर्ज़ ले लेती है और उसकी किस्तें नहीं भर पाती, तो वह “डेब्ट ट्रैप” (कर्ज़ के जाल) में फंस जाती है। आसान शब्दों में कहें तो, कर्ज़ लेना तब तक सही है जब तक आपका मुनाफा आपके ब्याज से ज़्यादा हो; अगर ब्याज ज़्यादा और मुनाफा कम है, तो बड़े से बड़ा साम्राज्य भी मिट्टी में मिल जाता है।

बिज़नेस की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपने कितना कर्ज़ लिया है, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि आप उसे मैनेज कैसे करते हैं। टाटा, रिलायंस और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों पर लाखों करोड़ का कर्ज़ है, लेकिन उनका मैनेजमेंट इतना सटीक है कि वे कभी “कर्ज़ के जाल” में नहीं फंसते। इसके विपरीत, बायजूस (BYJU’S) जैसी कंपनियां भारी-भरकम मार्केटिंग, बड़े ब्रांड एंबेसडर और अंधाधुंध विस्तार के चक्कर में डूब गईं क्योंकि उनकी कमाई उनके कर्ज़ को चुकाने के लिए काफी नहीं थी। यही कहानी वीडियोकॉन, किंगफिशर और अनिल अंबानी के साम्राज्य की भी रही, जहाँ सही वित्तीय संतुलन न होने के कारण बड़े-बड़े बिज़नेस पूरी तरह बर्बाद हो गए।

कर्ज़ के जाल से बचने के लिए कंपनियों को दो ज़रूरी हिसाब समझने होते हैं। पहला है ISCR, जो यह बताता है कि कंपनी अपनी कमाई से सिर्फ कर्ज़ का ‘ब्याज’ चुका पाएगी या नहीं। दूसरा है DSCR, जो यह देखता है कि कंपनी के पास ब्याज के साथ-साथ ‘मूल रकम’ चुकाने की भी ताकत है या नहीं। सरल शब्दों में, अगर कोई कंपनी इन दो पैमानों पर खरी नहीं उतरती, तो वह कर्ज़ में डूबने लगती है। सफल कंपनियां हमेशा यह सुनिश्चित करती हैं कि उनकी कमाई इन किस्तों से काफी ज़्यादा हो, ताकि बुरा वक्त आने पर भी उनका बिज़नेस न रुके।

बिज़नेस के डूबने की एक बड़ी वजह यह होती है कि जब आपके कर्ज़ की ब्याज दर आपके मुनाफे से ज़्यादा हो जाए। उदाहरण के लिए, अगर आप बाज़ार से 15% ब्याज पर पैसा उधार लेते हैं, लेकिन उस पैसे को बिज़नेस में लगाकर आप केवल 12% मुनाफा कमा पा रहे हैं, तो आप हर साल 3% के घाटे में जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में आप अपना बिज़नेस जितना ज़्यादा बढ़ाएंगे, उतनी ही तेज़ी से आप कंगाली की ओर बढ़ेंगे क्योंकि आपका विस्तार आपको मुनाफे के बजाय और गहरे कर्ज़ में धकेलता जाएगा।

इस पूरी बात का सबसे बड़ा सबक यह है कि बिना अच्छे मुनाफे के अपने बिज़नेस को फैलाना “आत्महत्या” करने जैसा है। अगर बिज़नेस में कड़े अनुशासन और सही नियमों का पालन न किया जाए, तो कर्ज़ आपका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है जो पूरे साम्राज्य को खत्म कर सकता है। असल में जीत इस बात से तय नहीं होती कि आपने कितना पैसा उधार लिया है, बल्कि इस बात से तय होती है कि क्या आपके बिज़नेस में इतनी कमाई और कैश फ्लो है कि आप उस कर्ज़ को बिना रुके चुका सकें।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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