ऑक्सफोर्ड-हार्वर्ड से 1000 साल पहले भारत में बनी थी पहली रेसिडेंशियल यूनिवर्सिटी

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (03/01/2026): ऑक्सफोर्ड या हार्वर्ड जैसी दुनिया की बड़ी यूनिवर्सिटीज़ बनने से बहुत पहले, भारत के बिहार (प्राचीन मगध) में दुनिया का पहला ऐसा विश्वविद्यालय था जहाँ छात्र रहकर पढ़ाई करते थे: नालंदा। इसकी शुरुआत 5वीं शताब्दी में हुई थी और लगभग 700 सालों तक यह ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा।

अपने सबसे सुनहरे दौर में, यहाँ दुनिया भर से (जैसे कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत और तुर्की) लगभग 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक एक साथ रहते थे। आज नालंदा एक ‘यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट’ है। यह उस दौर की याद दिलाता है जब भारत शिक्षा और सोच-विचार के मामले में दुनिया का नेतृत्व करता था, जिसे इतिहास से लगभग मिटा ही दिया गया था।

नालंदा का शिक्षा सिस्टम अपने समय से बहुत आगे था। यहाँ एडमिशन लेना आसान नहीं था, गेट पर खड़े विद्वान (द्वारपाल) एक कठिन टेस्ट लेते थे, जिसे 10 में से केवल 2 या 3 छात्र ही पास कर पाते थे। यहाँ केवल एक चीज़ नहीं सिखाई जाती थी, बल्कि छात्र एक साथ अंतरिक्ष विज्ञान, गणित, डॉक्टरी और धर्म जैसे कई विषय पढ़ते थे। इसकी सबसे खास बात थी यहाँ की लाइब्रेरी ‘धर्मगंज’, जहाँ तीन बड़ी इमारतों में लाखों हाथ से लिखी किताबें रखी थीं—इसमें ‘रत्नासागर’ नाम की इमारत 9 मंजिल ऊँची थी। मशहूर चीनी यात्री ह्वेनसांग ने बताया है कि यहाँ की इमारतें बहुत ऊँची और भव्य थीं, और यहाँ छात्र केवल रट्टा नहीं मारते थे बल्कि हर रोज़ योग, पढ़ाई और आपस में बहस करके ज्ञान बढ़ाते थे।

12वीं सदी के अंत (करीब 1193 ईस्वी) में नालंदा यूनिवर्सिटी का बहुत बुरा अंत हुआ, जब दिल्ली के सेनापति बख्तियार खिलजी ने इस पर हमला कर दिया। कहा जाता है कि खिलजी बहुत बीमार था और जब उसके अपने हकीम उसे ठीक नहीं कर पाए, तब नालंदा के एक डॉक्टर ने उसे ठीक कर दिया। खिलजी इस बात से चिढ़ गया कि भारतीयों के पास इतना ज्ञान कैसे है, और इसी नफरत में उसने यूनिवर्सिटी को तबाह करने का हुक्म दे दिया। उसकी सेना ने वहां की लाइब्रेरी में आग लगा दी, जिसमें इतनी ज्यादा किताबें थीं कि वे लगातार तीन महीनों तक जलती रहीं। वहां पढ़ने वाले कई विद्वानों को मार दिया गया और बाकी को भागना पड़ा, जिससे यह शानदार जगह मलबे के ढेर में बदल गई और लोग सदियों तक इसके बारे में भूल गए।

यह शानदार जगह सदियों तक मिट्टी के ढेरों के नीचे छिपी रही, किसी को पता भी नहीं था कि यहाँ कभी इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी थी। फिर 1812 में एक ब्रिटिश ऑफिसर फ्रांसिस बुकानन-हैमिल्टन ने इन खंडहरों को पहचाना, और 1860 के आसपास सर अलेक्जेंडर कनिंघम ने यहाँ खुदाई करवाकर इसे दुनिया के सामने लाए। नालंदा की यादों को फिर से ज़िंदा करने के लिए साल 2010 में भारत सरकार ने एक कानून पास किया, ताकि पुरानी यूनिवर्सिटी के पास ही एक नई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी बनाई जा सके। आखिरकार, 2024 में इस नई यूनिवर्सिटी के शानदार कैंपस की शुरुआत हुई और इसका उद्घाटन किया गया।

ज्ञान को कभी पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता। भले ही वे पुरानी हाथ से लिखी किताबें और एक टीचर पर पाँच छात्रों वाला बेहतरीन सिस्टम समय के साथ खो गया हो, लेकिन इस यूनिवर्सिटी का दोबारा बनना भारत के शानदार इतिहास और आने वाले सुनहरे भविष्य को जोड़ता है। आज भी इसके खंडहर हमें उस समय की याद दिलाते हैं जब भारत पूरी दुनिया के लिए ज्ञान का केंद्र था और यहाँ से विज्ञान और सोच-विचार की बातें पूरी दुनिया में फैली थीं।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति ,   दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।

टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.


Discover more from टेन न्यूज हिंदी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

टिप्पणियाँ बंद हैं।