सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अलर्ट मोड में दिल्ली सरकार, ई-बसों और ई-ऑटो पर दे रही विशेष जोर

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (30 December 2015): सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। सरकार सड़क से लेकर मेट्रो नेटवर्क तक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और प्रदूषण पर सख्त निगरानी के लिए कई ठोस कदम उठा रही है। निगरानी, एनफोर्समेंट, धूल नियंत्रण और इलेक्ट्रिक परिवहन के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है, ताकि प्रदूषित हवा से पैदा हो रही स्वास्थ्य चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर एंटी स्मॉग गन, मेट्रो में अतिरिक्त ट्रिप्स और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर प्रदूषण कम करने की दिशा में एक साथ कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। सरकार की रणनीति रोकथाम, सख्त प्रवर्तन और स्वच्छ वैकल्पिक परिवहन पर आधारित है।

पर्यावरण विभाग और दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल समिति के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समीक्षा बैठक हुई। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, CAQM और CPCB के साथ समन्वय कर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई सख्त कदम लागू किए गए हैं। इन उपायों के तहत निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया गया है।

धूल नियंत्रण, खुले में कचरा जलाने, औद्योगिक और वाहन प्रदूषण पर रोक के लिए हजारों टीमें दिन-रात तैनात की गई हैं। जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस और नगर निगम अधिकारियों की संयुक्त टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। खुले में कचरा, पत्ते और प्लास्टिक जलाने पर मौके पर ही चालान और जुर्माना लगाने के अधिकार स्थानीय अधिकारियों को दिए गए हैं।

ग्रैप के तहत सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। ग्रैप-2 के दौरान दिल्ली मेट्रो ने 40 अतिरिक्त ट्रिप्स और ग्रैप-3 में 60 अतिरिक्त ट्रिप्स चलाईं। डीएमआरसी की ओर से 44 मेट्रो स्टेशनों पर 1,823 ई-ऑटो तैनात किए गए हैं, जबकि मार्च 2026 तक 476 और ई-ऑटो जोड़ने की योजना है। ई-रिक्शा सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

बस फ्लीट के आंकड़ों पर नजर डालें तो 30 नवंबर 2025 तक दिल्ली की कुल बस संख्या 5,295 हो चुकी है, जिसमें 3,427 इलेक्ट्रिक और 1,868 सीएनजी बसें शामिल हैं। मार्च 2026 तक 1,988 नई ई-बसें और दिसंबर 2026 तक अतिरिक्त 510 इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत कुल 2,800 ई-बसें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे दिसंबर 2026 तक करीब 7,500 क्लीन फ्यूल बसें सड़कों पर होंगी।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। फिलहाल 388 एंटी स्मॉग गन, 270 वॉटर स्प्रिंकलर और 75 मैकेनिकल रोड स्वीपर रोजाना हजारों किलोमीटर सड़क नेटवर्क को कवर कर रहे हैं। 13 प्रमुख प्रदूषण हॉट स्पॉट्स पर 326 मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए गए हैं। निर्माण एवं ध्वंस कचरे के प्रबंधन के लिए 132 संग्रहण स्थल पहले से मौजूद हैं, जबकि एमसीडी ने 14 नए मलबा संग्रहण स्थलों को विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।।


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