New Delhi News (27 December 2025)): उन्नाव रेप केस के आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। CBI ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट के 23 दिसंबर के फैसले को कानून के खिलाफ और गलत बताया है। एजेंसी का कहना है कि इस आदेश से न सिर्फ पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा पर खतरा है, बल्कि समाज में भी गलत संदेश गया है।
CBI ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि हाई कोर्ट यह समझने में नाकाम रहा कि सेंगर एक मौजूदा विधायक रह चुका है और एक संवैधानिक पद पर रहते हुए उसने अपने अधिकार और भरोसे का दुरुपयोग किया। एजेंसी के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपी की जिम्मेदारी सामान्य व्यक्ति की तुलना में कहीं अधिक होती है। सजा निलंबन के आदेश के बाद पीड़िता और उसके परिवार समेत आम लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला और विरोध प्रदर्शन भी हुए।
केंद्रीय एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के उद्देश्य और पीड़ित-केंद्रित भावना को नजरअंदाज किया। CBI ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है और इसकी धारा 5(सी) के तहत किया गया अपराध सांसदों और विधायकों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों से भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इसमें बच्चों के सीधे शोषण के साथ गंभीर शारीरिक, मानसिक और नैतिक क्षति शामिल होती है।
CBI ने अपनी अर्जी में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम दोनों का विधायी उद्देश्य एक समान है, यानी सार्वजनिक पद और अधिकार के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई। एजेंसी का कहना है कि जब किसी व्यक्ति को ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया जा चुका हो, तो अपीलीय अदालत को सामान्य रूप से यह मानकर चलना चाहिए कि आरोपी दोषी है और उसकी सजा को निलंबित करना अपवाद होना चाहिए, नियम नहीं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सेंगर को जमानत पर रिहा करना और अपील लंबित रहने के दौरान उसकी सजा को सस्पेंड करना न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे पीड़िता और उसके परिवार की भलाई और सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। CBI ने यह भी रेखांकित किया कि सेंगर चार बार विधायक रह चुका है और उस पर आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत दोष सिद्ध हो चुका है।
इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन, सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना और पीड़िता की मां समेत कई लोग दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए। पीड़िता की मां ने कहा कि उनकी बेटी ने बहुत दर्द सहा है और हाई कोर्ट के फैसले ने उनका भरोसा तोड़ दिया है।गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबित जरूर की है, लेकिन वह फिलहाल जेल में ही रहेगा, क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उसे अलग से 10 साल की सजा सुनाई गई है, जिसमें उसे जमानत नहीं मिली है।।
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